रायपुर : छत्तीसगढ़ विधानसभा में गुरुवार को प्रश्नकाल के दौरान विधायक दलेश्वर साहू ने सहकारिता एवं निजी क्षेत्रों को लक्ष्य के विरुद्ध खाद्य का वितरण का मुद्दा उठाया. विधायक ने सवाल किया कि उर्वरक आबंटन में सहकारिता में 48 प्रतिशत और निजी को 52 प्रतिशत क्यों है, जबकि आपके जवाब में 70 प्रतिशत है. यह विरोधाभास क्यों? जवाब में मंत्री रामविचार नेताम में आंकड़ों की विश्वसनीयता को लेकर सवाल खड़े करते हुए पूछा कि आप कहां से आंकड़ा ला रहे हैं?
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मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि 3 पन्नों में उत्तर उपलब्ध कराया गया है. खाद का कुल भंडारण सहकारिता क्षेत्र में 64 प्रतिशत का और निजी क्षेत्रों में कुल भंडारण 36 प्रतिशत है. आप कहां से आंकड़ा ला रहे है। ये तो आप गुमराह करने की स्थिति बना रहे हैं, मैं सही उत्तर दे रहा हूं. इस पर विधायक ने कहा कि कई ऐसे इलाके हैं, जहां लक्ष्य के विरुद्ध खाद्य का वितरण किया जा रहा है. जहां 10 मांगा जा रहा वह 25 दिया जा रहा है. उसकी जांच समिति के माध्यम से कराएंगे क्या? आपके पास कम्पनी का कंट्रोल ही नहीं है. आखिरकार कंपनियों में कंट्रोल किसका है?
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मंत्री ने बताया कि ट्रायबल क्षेत्र हमारी प्राथमिकता है. यहां पर बहुत कम समय पर खाद पहुंच पाता है, इसलिए वहां हमने पूर्ति पहले की है, बाकी क्षेत्रों में खाद्य समय पर पहुंच जाता है। रही बात कंपनियों के नियंत्रण की, तो इनको आबंटन भारत सरकार करती है. हमारी प्लानिंग बस यह होती है कि किस क्षेत्र को आबंटन पहले किया जाना है? इस पर विधायक दलेश्वर साहू ने सवाल किया कि क्या 50 प्रतिशत से ज्यादा कंही पर खाद्य दिया जा रहा है, वहां जांच कराएंगे क्या? इस पर मंत्री नेताम ने दो टूक कह दिया कि जांच का कोई औचित्य ही नहीं है.


