कोरबा: बरसात के दौरान जब नदी-नाले उफान पर होते हैं, तब गांवों के लिए पुल केवल एक संरचना नहीं, बल्कि जीवनरेखा बन जाते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए कलेक्टर कुणाल दुदावत ने पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड के सुदूर गांवों का दौरा कर क्षतिग्रस्त पुल-पुलियों का निरीक्षण किया। लगातार बारिश और तेज बहाव के कारण पनगंवा, सुखरीताल, हरदेवा और सरमा गांवों के पुल-पुलिया क्षतिग्रस्त हो गए हैं। शहर से करीब 90 से 100 किलोमीटर दूर स्थित इन गांवों तक पहुंचने वाले रास्ते कीचड़ और फिसलन से भरे थे। कई स्थानों पर वाहन आगे नहीं जा सके। इसके बावजूद कलेक्टर ने अपनी कार रास्ते में छोड़ दी और पैदल चलकर प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया।
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सुखरीताल और हरदेवा के बीच उफान में क्षतिग्रस्त हुए पुल का निरीक्षण करने के बाद उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बारिश समाप्त होने के बाद नए पुल का निर्माण वैज्ञानिक डिजाइन और पर्याप्त जल निकासी क्षमता के साथ किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने। इसके बाद कलेक्टर ने बकई नदी पर प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के पनगंवा-सरमा मार्ग का भी जायजा लिया। ग्रामीणों ने बताया कि पुल का बड़ा हिस्सा टूट जाने से आवागमन पूरी तरह बंद है। इस पर कलेक्टर ने पीएमजीएसवाई के कार्यपालन अभियंता (EE) सी.एस. तंवर को बाढ़ आपदा राहत मद से शीघ्र प्रस्ताव तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
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उन्होंने लोक निर्माण विभाग (PWD) की क्षतिग्रस्त पुलिया पर तत्काल मिट्टी भरकर आवागमन बहाल करने और बारिश समाप्त होते ही नई एवं मजबूत पुलिया का निर्माण कराने के निर्देश भी दिए। निरीक्षण के दौरान एसडीएम सहित अन्य अधिकारी भी कठिन रास्तों से बाइक के जरिए मौके पर पहुंचे। कलेक्टर ने कहा कि प्राथमिकता केवल तत्काल मरम्मत नहीं, बल्कि भविष्य के लिए मजबूत और टिकाऊ निर्माण सुनिश्चित करना है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि भारी बारिश के दौरान उफनते नदी-नालों को पार करने का जोखिम न उठाएं। कलेक्टर का स्पष्ट संदेश था कि क्षतिग्रस्त पुलों की केवल अस्थायी मरम्मत नहीं, बल्कि ऐसे स्थायी और मजबूत निर्माण किए जाएं जो आने वाले वर्षों में भी बाढ़ का सामना कर सकें और ग्रामीणों का सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करें।


