राष्ट्रपति द्वारा सुप्रीम कोर्ट से सलाह मांगे जाने के खिलाफ दायर याचिकाओं पर मंगलवार को सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई हुई। इस दौरान, कोर्ट ने केरल और तमिलनाडु सरकार की ओर से दायर की गई अर्जी पर एक अहम टिप्पणी की।
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सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया कि अगर राष्ट्रपति शीर्ष अदालत से सलाह लेना चाहते हैं, तो इसमें गलत क्या है? कोर्ट की इस टिप्पणी ने संवैधानिक मामलों में राष्ट्रपति के अधिकार क्षेत्र पर एक महत्वपूर्ण बहस छेड़ दी है।
दरअसल, संविधान के अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति को यह अधिकार है कि वह किसी कानूनी या तथ्यात्मक मामले पर सुप्रीम कोर्ट से सलाह मांग सकते हैं। केरल और तमिलनाडु सरकार की याचिकाओं में इस अधिकार के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया था। हालांकि, कोर्ट ने अपने शुरुआती रुख में यह स्पष्ट कर दिया कि इस तरह की सलाह लेना राष्ट्रपति का संवैधानिक अधिकार है।
इस मामले में अभी सुनवाई जारी है और कोर्ट यह तय करेगा कि क्या राष्ट्रपति द्वारा मांगी गई सलाह पर आपत्ति जताई जा सकती है या नहीं। यह सुनवाई भविष्य में राष्ट्रपति और न्यायपालिका के बीच संबंधों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।


