श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि इस फैसले में जमीनी हालात का आकलन जरूरी है और “पहलगाम में जो हुआ, उसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।”
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यह मामला 2019 में आर्टिकल 370 हटाने और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम लागू होने के बाद से जुड़ा है, जिसके तहत प्रदेश को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित कर केंद्रशासित प्रदेश बनाया गया था। बीते छह वर्षों से राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग जारी है।
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र का पक्ष रखते हुए कहा कि इस पर फैसला लेने की प्रक्रिया में कई पहलुओं पर विचार किया जा रहा है। कोर्ट ने शिक्षाविद जहूर अहमद भट और सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता अहमद मलिक द्वारा दायर याचिका पर केंद्र को आठ सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन द्वारा जल्द सुनवाई की मांग पर CJI ने स्पष्ट किया कि राज्य का दर्जा बहाल करने का फैसला संसद और कार्यपालिका को लेना है, और इसमें सुरक्षा एवं शांति की स्थिति को नज़र में रखना आवश्यक है।


