जौनपुर। कोडीन युक्त कफ सिरप की कालाबाजारी और अवैध सप्लाई नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए जौनपुर एसआईटी ने ताबड़तोड़ कार्रवाई तेज कर दी है। जांच टीम ने बीते तीन दिनों में 16 फर्म संचालकों के 30 बैंक खाते फ्रीज कर दिए हैं। इस काले कारोबार से जुड़े फर्जी बिलिंग और मनी ट्रेल ने बड़े सिंडिकेट के नेटवर्क का खुलासा कर दिया है।
6 जिलों में भेजे गए बिलिंग दस्तावेज, बड़ा रैकेट उजागर
जौनपुर एसआईटी ने जौनपुर से हुई बिलिंग की जांच के लिए दस्तावेज गाजीपुर, आजमगढ़, प्रतापगढ़, चंदौली, मिर्जापुर और वाराणसी भेजे हैं।
जांच में सामने आया कि इन जिलों में फर्जी फर्मों के नाम से भारी मात्रा में कोडीन युक्त कफ सिरप की सप्लाई दिखाई गई थी।
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18 लोगों पर मुकदमा, 45 करोड़ का लेन-देन संदिग्ध
जौनपुर शहर कोतवाली में इस मामले में कुल 18 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।
इनके खातों और फर्मों से जुड़े 45.06 करोड़ रुपये के लेन-देन को संदिग्ध पाया गया है। एसआईटी बैंक खातों, जीएसटी रिकॉर्ड और फर्जी बिलिंग की परतें खंगाल रही है।
12 फर्में सिंडिकेट प्रमुख से जुड़ी, 42.45 करोड़ का अवैध कारोबार
एसआईटी की जांच में बड़ा खुलासा यह हुआ कि 12 फर्में सीधे सिंडिकेट प्रमुख शुभम जायसवाल और उनके पिता भोला प्रसाद सिंह की रांची स्थित फर्म ‘सेल ट्रेडर्स’ से जुड़ी पाई गई हैं।
इन फर्मों के जरिए 42.45 करोड़ रुपये का अवैध कारोबार कोडीन सिरप की सप्लाई के नाम पर किया गया।
सूत्रों के मुताबिक, यह सिंडिकेट कफ सिरप की शिपमेंट को दवा व्यापार दिखाकर वास्तव में अवैध खपत और नशे की सप्लाई चेन को मजबूत करता था।
एसआईटी ने कसा शिकंजा, आगे और बड़ी कार्रवाई संभव
जांच अधिकारियों का कहना है कि पूरे फर्जी नेटवर्क को तोड़ने के लिए बैंक स्टेटमेंट, जीएसटी ट्रांजैक्शन, ट्रांसपोर्ट बिल और डिजिटल साक्ष्यों की गहन जांच जारी है।
एसआईटी जल्द ही इस घोटाले में शामिल अन्य फर्म संचालकों, एजेंटों और फाइनेंसरों पर भी बड़ी कार्रवाई कर सकती है।


