मुंबई। महाराष्ट्र में हिंदी भाषा को लेकर उठे विवाद के बीच शनिवार को एक ऐतिहासिक क्षण देखने को मिला जब शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे वर्षों बाद एक मंच पर साथ नजर आए। “विशाल विजय समारोह” नामक इस कार्यक्रम का आयोजन तीन-भाषा नीति को वापस लेने के निर्णय के स्वागत में किया गया था।
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कार्यक्रम में चुटीले अंदाज में बोलते हुए राज ठाकरे ने कहा, “मुख्यमंत्री फडणवीस वह करने में कामयाब रहे जो मेरे चाचा और शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे भी नहीं कर सके — यानी मुझे और उद्धव को एक मंच पर लाना।”
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उन्होंने आगे चेतावनी भरे लहजे में कहा, “विधान भवन में आपकी सत्ता हो सकती है, लेकिन सड़कों पर हमारी सत्ता है। महाराष्ट्र सरकार ने मराठी एकता के दबाव में तीन-भाषा फॉर्मूला वापस लिया है। अब कोई महाराष्ट्र को छूकर देखे, परिणाम सामने होगा।”
राज ठाकरे ने आरोप लगाया कि तीन-भाषा नीति मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करने की एक चाल थी। वहीं, उन्होंने मराठी भाषा और संस्कृति को कमजोर करने की कोशिशों के खिलाफ एकजुटता दिखाने की अपील भी की।
कार्यक्रम में मंच पर मौजूद उद्धव ठाकरे ने भी संकेत दिए कि दोनों नेता अब आगे साथ रह सकते हैं। उन्होंने कहा, “हम साथ आए हैं और साथ रहेंगे। हमारे बीच की दूरी खत्म हो गई है।” उन्होंने आगे कहा, “राज ने जो कहा, वह ही आज की सबसे बड़ी बात है। मुझे और कुछ कहने की जरूरत नहीं है।


