रायपुर : छत्तीसगढ़ में जनगणना ड्यूटी को लेकर एक महत्वपूर्ण कानूनी फैसला सामने आया है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने साफ तौर पर कहा है कि पंचायत और नगर निकायों में कार्यरत कर्मचारियों को जनगणना कार्य में लगाया जाना पूरी तरह वैध है और इससे बचने का कोई विकल्प नहीं है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह एक राष्ट्रीय दायित्व है, जिसे हर संबंधित कर्मचारी को निभाना ही होगा।
यह मामला बेमेतरा जिले के नवागढ़ जनपद पंचायत में पदस्थ सहायक ग्रेड-3 मनीष जैन से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कलेक्टर द्वारा 9 अप्रैल 2026 को जारी उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें जनगणना शाखा में अटैच किया गया था। याचिकाकर्ता का आरोप था कि यह आदेश दुर्भावनापूर्ण है और उन्हें परेशान करने के उद्देश्य से जारी किया गया है।
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हालांकि, सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि यह कोई सामान्य ट्रांसफर या अटैचमेंट नहीं है, बल्कि जनगणना अधिनियम 1948 के तहत दी गई एक विशेष ड्यूटी है। सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि आगामी जनगणना अभियान को सफल बनाने के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की आवश्यकता है, इसलिए इस प्रकार की नियुक्तियां जरूरी हैं।
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि जनगणना एक राष्ट्रीय महत्व का कार्य है और प्रशासन को यह अधिकार है कि वह आवश्यकतानुसार किसी भी कर्मचारी की ड्यूटी इस कार्य में लगा सकता है। साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जिस कर्मचारी को इस कार्य के लिए नियुक्त किया जाएगा, उसे उस दौरान “लोक सेवक” माना जाएगा और उसे अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना होगा।
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इस फैसले के बाद अब तक जो कर्मचारी जनगणना ड्यूटी से बचने के लिए कानूनी रास्ते तलाशते थे, उनके लिए यह विकल्प लगभग समाप्त हो गया है। अदालत ने यह भी कहा कि प्रशासनिक आदेशों का पालन करना कर्मचारियों की जिम्मेदारी है और इसमें किसी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जा सकती।


