कोरबा जिले में संचालित कोल इंडिया के मेगा प्रोजेक्ट में से एक कुसमुंडा खदान में कर्मचारियों के मूलभूत सुविधाओं और उनके मौलिक अधिकारों का हनन करने का गंभीर मामला सामने आया है। प्रबंधन की इस दमनकारी नीति को लेकर भारतीय खदान मजदूर संघ ने मोर्चा खोल दिया है।
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सोमवार को भारतीय खदान मजदूर संघ के तत्वाधान में कुसमुंडा महाप्रबंधक कार्यालय के सामने धरना प्रदर्शन किया गया और बाद में एक रैली भी निकाली गई जिसमें श्रमिक नेता एवं कर्मचारियों ने प्रबंधन के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए नजर आए।
आपको बता दें भ्रष्टाचार में लिप्त कुसमुंडा प्रबंधन की मनमानी किसी से छुपी नहीं है। मुखिया अपने चहेतो को लाभ पहुंचाने में लगा हुआ है जिसके कई उदाहरण भी सामने आए है।
इसी बीच कुसमुंडा खदान में कर्मचारियों के साथ शोषण करने का बड़ा मामला सामने आया है जहां खदान में कार्यरत मजदूरों के मूलभूत सुविधाओं जैसे आवास, पेयजल, जर्जर आवासों के मरम्मत, कालोनी में साफ – सफाई के साथ – साथ उनके कार्यस्थल में मिलने वाली सुविधाओं का हनन किया जा रहा है। आलम यह है कि अब भारतीय खदान मजदूर संघ ने सड़क की लड़ाई शुरू कर दी है।
लेकिन इस आंदोलन में अन्य श्रमिक संगठन दूरी बनाते हुए नजर आए जिसको लेकर अब चर्चाएं भी शुरू हो गई है। सूत्रों की माने तो चर्चा है कि क्या यह आंदोलन श्रमिकों के हित के विपरीत है या फिर अपने संबंधो को बनाए रखने के लिए अन्य श्रमिक संगठन ने दूरी बनाई है?
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अखिल भारतीय खदान मजदूर संघ के महामंत्री सुरजीत सिंह ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि भारतीय खदान मजदूर संघ ने मजदूर हित से जुड़े 13 मांगो को लेकर कुसमुंडा प्रबंधन के सामने बात रखी थी लेकिन इसे प्रबंधन की हठधर्मिता के चलते दमनकारी नीति के तहत दबाया जा रहा है जबकि सभी मांगे जायज है, जब तक समस्या का समाधान नहीं होगा आगे लड़ाई जारी रहेगी।


