कोरबा रविवार की सुबह एसईसीएल की कुसमुंडा मेगा परियोजना में हादसा हो गया। कोयला फेस में डंपिंग के लिए गया 60 टन वजनी डंपर अनियंत्रित होकर पलट गया। हादसे में डंपर ऑपरेटर राघवेंद्र को चोटें आई हैं। घायल अवस्था में उसे तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका उपचार जारी है। घटना ने एक बार फिर खदान की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, ऑपरेटर राघवेंद्र डंपर लेकर कोयला फेस में डंपिंग करने गया था। इसी दौरान डंपर का संतुलन बिगड़ा और वह कोयला फेस से फिसलकर नीचे जा गिरा। बताया जा रहा है कि डंपर वाहन ऊपर से स्लाइड होते हुए नीचे गिरा। हादसे के वक्त ऑपरेटर राघवेंद्र ने सूझबूझ दिखाते हुए किसी तरह वाहन से कूदकर अपनी जान बचाई। हालांकि गिरने से उसे गंभीर चोटें आई हैं।
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हादसे की सूचना मिलते ही खदान में हड़कंप मच गया। बड़ी संख्या में कर्मचारी मौके पर जमा हो गए। संबंधित विभाग के अधिकारी और तकनीकी कर्मचारी भी तत्काल घटनास्थल पर पहुंचे। डंपर को भारी मशक्कत के बाद क्रेन की मदद से सीधा किया गया। गनीमत रही कि हादसे के वक्त आसपास अन्य वाहन या कर्मचारी नहीं थे, वरना बड़ा नुकसान हो सकता था। इस घटना ने एसईसीएल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।कर्मचारियों का आरोप है कि खदान में सेफ्टी के नाम पर सिर्फ औपचारिकता निभाई जा रही है। हर साल सेफ्टी वीक और मार्च निकाले जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी हो रही है। कोयला फेस की ढलान, डंपिंग पॉइंट की मजबूती और वाहनों की नियमित जांच में लापरवाही बरती जा रही है। प्रबंधन की इसी लापरवाही का नतीजा यह हादसा है।
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कर्मचारी संगठनों ने घटना की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि डंपर ऑपरेटरों पर उत्पादन का दबाव रहता है, जिसके कारण कई बार सुरक्षा नियम ताक पर रख दिए जाते हैं। बारिश के मौसम में कोयला फेस पर फिसलन बढ़ जाती है, इसके बावजूद पर्याप्त सावधानी नहीं बरती गई। फिलहाल घायल ऑपरेटर का उपचार चल रहा है। एसईसीएल प्रबंधन ने हादसे की जांच के आदेश दिए हैं। कुसमुंडा खदान एशिया की सबसे बड़ी कोयला खदानों में से एक है। यहां आए दिन होने वाले हादसे मजदूरों की सुरक्षा को लेकर प्रबंधन के दावों पर सवाल उठाते हैं।


