कोरबा – जिला परिवहन कार्यालय कोरबा एक बार फिर सुर्खियों में है। लंबे समय से प्रभार पर चल रहे जिला परिवहन अधिकारी विवेक सिन्हा की पोस्टिंग के बाद से परिवहन कार्यालय में अनाधिकृत लोगों का जमावड़ा सबसे ज्यादा देखने को मिल रहा है। पूर्व में भी ऐसी ही स्थिति परिवहन कार्यालय की थी जिसको लेकर लगातार शिकायतें जिला स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक की गई थी जिसके बाद कथित एजेंट और अनाधिकृत लोगों का कार्यालय में प्रवेश प्रतिबंधित हो गया था।

लेकिन एक बार फिर जिला परिवहन कार्यालय के बाहर और अंदर कथित एजेंटों का जमावड़ा हर दिन देखने को मिल सकता है जिसकी बानगी भी देखने को मिल रही है। इन कथित एजेंटों की पहुंच बाबू के माध्यम से विभाग के अधिकांश कार्यों में हो रही है जिसकी कुछ तस्वीर भी सामने आई है।
यह कथित एजेंट परिवहन कार्यालय के बाहर अवैध कब्जा कर दुकानों का संचालन कर रहे हैं जहां पर इनकी दुकानदारी चल रही है और बाबू का संरक्षण प्राप्त होने के कारण इनका मनोबल इतना बड़ा हुआ है कि यह दफ्तर के अंदर और बाहर कभी भी आ जा सकते हैं। इतना ही नहीं आम लोगों को जहां पर प्रवेश नहीं मिलता है वहां पर भी उनकी पहुंच बनी हुई है।
ताजा मामला परिवहन कार्यालय के कमरा नंबर – 3 का है। पूरा मामला शाखा प्रभारी विकास ठाकुर से जुड़ा हुआ है। विकास ठाकुर की पोस्टिंग पिछले वर्ष ही अन्यत्र जिले से स्थानांतरित होकर कोरबा जिले में हुई हैं। अपनी पोस्टिंग के बाद से बाबू की मनमानी किसी से छुपी नहीं है। वैसे आम लोगों के लिए बाबू परिवहन विभाग के कानून की पाठ पढ़ाने में कभी पीछे नहीं रहे हैं लेकिन इनके इर्द गिर्द मंडराने वाले चहेते कथित एजेंटों को प्रशय देने में भी इनका बड़ा हाथ है।
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जानकारी अनुसार पिछले वर्ष एक मृत व्यक्ति के नाम के वाहन को नियमों को तक पर रखते हुए फाइनेंस कंपनी के नाम पर ट्रांसफर कर दी गई जिसे बाद में तीसरे व्यक्ति के नाम ट्रांसफर कर दी गई है। इस पूरे प्रकरण में शाखा प्रभारी विकास ठाकुर, डीटीओ सिन्हा, कथित एजेंट लालू सहित फाइनेंस कंपनी के जिम्मेदार अधिकारी की संलिप्तता नजर आ रही है जिसकी लिखित शिकायत परिवहन विभाग के उच्च अधिकारियों से करते हुए मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की गई है।

सूत्रों से जानकारी प्राप्त हो रही है कि शिकायत की खबर सामने आते ही जिम्मेदार अधिकारी मामले को दबाने का प्रयास कर रहे हैं। सूत्रों से यह भी खबर प्राप्त हो रही है कि संबंधित फाइल में भी छेड़खानी की जा सकती है ताकि जांच को प्रभावित किया जा सके और लगाए गए आरोपी को भी निराधार किया जा सके। लेकिन सच्चाई यह है कि किसी भी प्रकरण की प्रक्रिया दस्तावेजीय होती है और विभाग द्वारा लिए जाने वाला शुल्क ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत है। इस मामले में भी दस्तावेज ही किए गए गड़बड़ी का खुलासा करेगी।
कमरा नंबर 3 की कहानी पहले भी रही है सुर्खियों में
जिला परिवहन कार्यालय का तीन नंबर कमरा पहले भी सुर्खियों में रहा है। पूर्व में पदस्थ सेवानिवृत्त महिला बाबू के ऊपर भी घूस लेने का गंभीर आरोप लगा था जिससे जुड़ी कुछ तस्वीर भी सोशल मीडिया में वायरल हुई थी। एक बार फिर कमरा नंबर 3 सुर्खियों में है जहां बैठ रहे शाखा प्रभारी विकास ठाकुर की मनमानी सामने आई है। यहां शाखा प्रभारी के साथ कथित एजेंटों की बैठकें सबसे ज्यादा होती है।
अतिरिक्त प्रभार में जिला परिवहन कार्यालय
कोरबा जिले को औद्योगिक जिले के रूप में पूरे प्रदेश में जाना जाता है। यहां पर संचालित कोयला खदानों एवं उद्योगों के कारण भारी संख्या में परिवहन कार्यालय से संबंधित कार्य आए दिन आते रहते हैं। परंतु दुर्भाग्य की बात है कि इतना बड़ा जिला होने के बावजूद जिला परिवहन अधिकारी पिछले एक वर्ष से प्रभार पर है जबकि यहां अतिरिक्त प्रभार में पदस्थ जिला परिवहन अधिकारी की मूल पदस्थापना छत्तीसगढ़ के नवीन जिला गौरेला पेंड्रा मरवाही में है जो कि कोरबा जिले से काफी छोटी है। दो जिले का प्रभार होने के कारण अधिकारी का कार्यालय में उपस्थिति भी सप्ताह में दो या तीन दिन रहता है जिसके कारण भी यहां पर कार्य प्रभावित हो रहा है इसके अलावा अनाधिकृत लोगों का जमावड़ा बना रहता है जिससे आम जनता को सबसे ज्यादा दिक्कतें हो रही है।
शासकीय दस्तावेजों की गोपनीयता हो रही भंग
सूत्रों की माने तो परिवहन कार्यालय में कथित एजेंट एवं अनाधिकृत लोगों का दखल इतना बढ़ गया है कि अब शासकीय दस्तावेजों की गोपनीयता पर भी सवाल उठने लगा है। इस बात की पुष्टि सक्षम अधिकारी द्वारा औचक निरीक्षण करने से की जा सकती है। इसके अलावा कार्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरे के फुटेज भी इस बात को प्रमाणित कर सकता है


