कोरबा : कोरबा जिले के नगरीय क्षेत्रों की सड़कों पर खुले में घूमते मवेशियों और उनके उचित व्यवस्थापन को लेकर कोरबा कलेक्टर कुणाल दुदावत ने सख्त रुख अपनाया है। बताया जा रहा है कि एसडीएम के निर्देश के बाद भी कटघोरा और छुरीकला नगरीय निकाय के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों मामले को गंभीरता से नहीं लिया। निर्देशों के बावजूद सड़कों पर मवेशियों के विचरण को लेकर कलेक्टर कुणाल दुदावत ने कटघोरा और छुरीकला नगरीय निकाय के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब मांगा है। जानकारी के मुताबिक सड़क सुरक्षा/प्रोटोकॉल कार्यक्रम के तहत SDM कटघोरा द्वारा संबंधित क्षेत्र में विशिष्ट अतिथियों के भ्रमण को देखते हुए नगरीय निकायों को सड़कों पर घूम रहे मवेशियों के उचित व्यवस्थापन और उन्हें सुरक्षित स्थान पर रखने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन एसडीएम के निर्देश के बाद भी कटघोरा और छुरीकला नगरीय निकाय के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों मामले को गंभीरता से नहीं लिया। 29 अगस्त 2026 को विशिष्ट अतिथियों के भ्रमण के दौरान सड़कों पर मवेशी घूमते पाए गए। प्रशासन ने इसे पहले दिए गए निर्देशों की अनदेखी माना है।
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इस मामले पर अब कलेक्टर ने नगर पालिका परिषद कटघोरा के CMO मुद्रिका प्रसाद तिवारी और नगर पंचायत छुरीकला के CMO मोहर लाल गहवरिया से तीन दिवस के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है। नोटिस में यह भी उल्लेख किया गया है कि केवल वीआईपी या विशिष्ट अतिथियों के भ्रमण के दौरान ही नहीं, बल्कि सामान्य दिनों में भी सड़क पर घूमने वाले मवेशियों के उचित व्यवस्थापन के लिए निकायों की कार्रवाई की प्रगति नगण्य रही है। मवेशियों के खुले में घूमने से सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। खासकर व्यस्त सड़कों पर अचानक मवेशियों के आ जाने से वाहन चालकों के लिए स्थिति खतरनाक हो सकती है।
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कलेक्टर द्वारा जारी नोटिस में कहा गया है कि नगर पंचायत क्षेत्र में मवेशियों के विचरण को रोकने और उन्हें सुरक्षित स्थान पर रखने के लिए दिए गए निर्देशों का विधिसम्मत पालन नहीं होना कार्य के प्रति उदासीनता को दर्शाता है। साथ ही उच्च अधिकारियों के निर्देशों को गंभीरता से नहीं लेने को कर्तव्य के प्रति तत्परता के अभाव के रूप में देखा गया है। मामले में दोनों नगरीय निकायों के CMO को तीन दिवस के भीतर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। कलेक्टर की इस कार्रवाई को सड़क सुरक्षा और नगरीय व्यवस्था को लेकर प्रशासन की सख्ती के तौर पर देखा जा रहा है। अब सभी की नजरें इस बात पर है कि संबंधित अधिकारियों की ओर से क्या स्पष्टीकरण दिया जाता है और उसके बाद प्रशासन की ओर से क्या कार्रवाई होती है।


