दुर्ग : जिला अस्पताल में 1 जून को सिकलिन पीड़िता दीपिका गाढ़ा की ब्लड नहीं मिलने से हुई मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच में लापरवाही सामने आने पर 2 डॉक्टरों समेत 7 स्वास्थ्यकर्मियों पर गाज गिरी है। वहीं बड़े अफसरों को बचाने के आरोप लग रहे हैं। कलेक्टर अभिजीत सिंह ने अपर कलेक्टर योगिता देवांगन और सीएमएचओ डॉ. मनोज दानी को जांच सौंपी थी। 20 दिन की जांच में सामने आया कि ब्लड बैंक में 85 यूनिट रक्त उपलब्ध होने के बावजूद पीड़िता को ब्लड नहीं दिया गया। परिजनों को डोनर तलाशने को कहा गया, लेकिन डोनर नहीं मिलने पर ब्लड उपलब्ध नहीं कराया गया। डॉक्टरों की भी लापरवाही पाई गई।
ग्रामीण की मौत पर फूटा आक्रोश: शव रखकर प्रदर्शन, चक्का जाम से घंटों ठप रहा यातायात
इस मामले में रेडक्रॉस सोसायटी से ब्लड बैंक में नियुक्त दो लैब टेक्निशियन तरन्नुम जहां और नशरा परवीन तथा एनएचएम से नियुक्त दो स्टाफ नर्स जागेश्वरी देवी और तनुजा चंद्राकर की संविदा सेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई है। वहीं स्टाफ नर्स अनसतसिया केरकेट्टा, पीजी रेजिडेंट डॉ. निखिल अग्रवाल और एनएचएम विशेषज्ञ डॉ. तृप्ति तिवारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए संयुक्त संचालक को पत्र भेजा गया है।
जांजगीर-चांपा के आंगनबाड़ी केंद्र में गिरा छत का प्लास्टर, बड़ा हादसा टला
आरोप है कि मौत के लिए प्रत्यक्ष-परोक्ष रूप से जिम्मेदार अफसरों को बचा लिया गया। प्रतिनियुक्ति पर सेवा दे रहे ब्लड बैंक के प्रभारी डॉ. जे.पी. मेश्राम और आरएमओ डॉ. अखिलेश यादव के बार-बार बयान बदलने के बाद भी उन पर कार्रवाई नहीं हुई। स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई से एनएचएम स्वास्थ्य कर्मचारी संगठन नाराज है। संगठन का आरोप है कि छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई कर प्रकरण को बंद करने की कोशिश की गई है। संगठन ने इस मामले में कलेक्टर से मिलकर निष्पक्ष कार्रवाई की मांग करने की बात कही है।


