कोरबा : केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की अनुमति से हर वर्ष की जाने वाली कूप कटाई को लेकर कोरबा जिले के कटघोरा वनमंडल अंतर्गत जटगा रेंज में विवाद की स्थिति निर्मित हो गई थी। ग्रामीणों के विरोध और दबाव के चलते कुछ समय के लिए कार्य रोकना पड़ा, लेकिन बाद में वन विभाग द्वारा समझाईश देने के बाद काम पुनः पूरा कराया गया। इस संबंध में कटघोरा डीएफओ कुमार निशांत ने बताया कि अब क्षेत्र में स्थिति सामान्य है और किसी तरह की कोई समस्या नहीं है।
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वन विभाग द्वारा इस वर्ष जटगा रेंज में कूप कटाई का कार्य हाथ में लिया गया था। प्रक्रिया के तहत अनुपयोगी, बीमार एवं मृतप्राय वृक्षों की पहचान कर उनकी सूची तैयार की गई और नियमानुसार उच्च स्तर पर भेजी गई। अनुमति मिलने के बाद कूप कटिंग का कार्य प्रारंभ किया गया। इस कार्य में रेंज का बड़ा क्षेत्र शामिल था, जहां संबंधित श्रेणी के सैकड़ों वृक्ष चिन्हित किए गए थे। वन विभाग का कहना है कि जंगल की बेहतरी और स्वस्थ वृक्षों के संरक्षण के लिए हर वर्ष इस प्रकार की कटाई आवश्यक होती है, ताकि रोगग्रस्त पेड़ों से अन्य पेड़ों को नुकसान न पहुंचे। साथ ही अनुपयोगी वृक्षों की कटाई कर उनका व्यावसायिक उपयोग भी किया जाता है।
हालांकि, कूप कटिंग शुरू होने के कुछ समय बाद आसपास के ग्रामीणों ने एक-दो स्थानों पर विरोध दर्ज कराया। ग्रामीणों का आरोप था कि अनुपयोगी पेड़ों की आड़ में हरे-भरे और स्वस्थ पेड़ों की कटाई की जा रही है, जिससे जंगल को नुकसान हो रहा है और उनकी आजीविका प्रभावित होगी। विरोध बढ़ने पर विभाग को अस्थायी रूप से काम रोकना पड़ा।
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कटघोरा डीएफओ कुमार निशांत ने बताया कि जटगा रेंज में कूप कटिंग में व्यवधान की सूचना मिलने पर तत्काल अधिकारियों को मौके पर भेजा गया। अधिकारियों ने ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी आपत्तियों को सुना और कूप कटिंग की पूरी प्रक्रिया को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझाया। ग्रामीणों की आशंकाओं को दूर करने के बाद कार्य को पुनः शुरू कराया गया और अब काम पूरा किया जा रहा है।


