सक्ती – पूर्व में जांजगीर जिले का हिस्सा रहा नवीन जिला सक्ती के कुछ धान खरीदी केंद्रों में फर्जी रकबा पंजीयन का खेल लंबे समय से चला आ रहा है। फर्जी रकबा पंजीयन होने से इन सोसायटियों में बोगस धान खरीदी भी हो रही है जिससे सरकार को हर बार बड़ा आर्थिक नुकसान हो रहा है।
ऐसे मामलों की प्रशासनिक स्तर पर शिकायत होने के बाद भी जिले में राजस्व विभाग के कुछ जिम्मेदार कर्मचारी अपने पद का फायदा उठाने में गुरेज नहीं कर रहे हैं, शायद यही कारण है कि प्रदेश की सुशासन सरकार को हर साल करोड़ों रुपए की आर्थिक क्षति हो रही है।
हर बार की तरह इस बार भी प्रदेश सरकार किसानों के एक-एक दाना धान को खरीदने की तैयारी में है। पूरे प्रदेश में 15 नवंबर से धान खरीदी शुरू होने जा रही है जिसकी तैयारी भी चल रही है। ऐसे में कहा जा रहा है कि क्या इस बार भी फर्जी रकबा का खेल चलेगा और बोगस खरीदी होगी या फिर ऐसे मामलों में प्रशासन की सख्त नजर रहेगी।
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आपको बता दें प्रदेश में भाजपा की नई सरकार बनने के बाद किसानों की आय को बढ़ाने के लिए धान का समर्थन मूल्य 3100 रुपए लागू किया गया है जिसमें प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीदना है। सरकार की किसान हितैषी निर्णय से धान का समर्थन मूल्य बढ़ने के बाद किसानों को इसका सीधा लाभ पहुंच रहा है जिससे उनको आर्थिक मजबूती भी मिल रही है।
लेकिन समर्थन मूल्य बढ़ने के बाद और पूर्ववर्ती सरकार में सक्ती जिले के कई खरीदी केंद्रों में फर्जी रकबा पंजीयन का खेल खूब जोर पकड़ा हुआ है और बोगस धान खरीदी भी होने लगी है जिसमें सबसे ज्यादा सक्ती ब्रांच में हो रहा है।
सूत्रों की माने तो पूर्व में कुछ धान खरीदी केंद्र अंतर्गत आने वाले ग्राम के हल्का पटवारी द्वारा किसानों के साथ मिलकर ऐसे फर्जी रकबे का भी पंजीयन किया गया था जिसमें फसल ही नहीं लगाया जाता है। सूत्रों की माने तो जिले की एक चर्चित सोसायटी जहां कुछ लोग तालाब, टिकरा और पहाड़ से लगी जमीनों का फर्जी पट्टा बनाकर उसको भी पंजीयन करा कर धान बेचा जा रहा है। वहीं कुछ ऐसे भी रकबे हैं जो व्यावसायिक रूप से डायवर्टेड हो चुके हैं जिसमें पोल्ट्री फॉर्म भी संचालित हो रहा है जो शासकीय कर्मचारी भी हैं फिर भी उन लोगों के द्वारा ऐसे जमीनों का पंजीयन कराया जा रहा है और पटवारियों के द्वारा आंख बंद करके घर बैठे गिरदावरी भी की जा रही है।
शिकायत के बाद भी हुई गिरदावरी
सूत्रों की माने तो ऐसे मामले सामने आने के बाद संबंधित विभाग में इसकी लिखित शिकायत भी की गई थी और हल्का पटवारी से बात भी किया गया था जिन्होंने सच्चाई को स्वीकारा भी था फिर भी दोबारा फर्जी गिरदावरी कर दी गई जो कि दस्तावेजीय प्रमाणित भी हैं।
जांच के बजाय पहुंचा रहे बेजा लाभ
इस पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारी उन शिकायतो की जांच पड़ताल करने के बजाय उसे पुड़िया बनाकर फाइलों में दफन कर दे रहे हैं। शिकायत में कार्रवाई नहीं होने के कारण ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति लगातार हो रही है जिससे फर्जीवाड़ा करने वालों के हौसले भी बुलंद नजर आ रहे हैं। ऐसे में सरकारी सिस्टम की कार्यशैली पर अब सवाल उठने लगा है, वहीं ऐसे मामले की पुनरावृत्ति होने की संभावना इस बार भी नजर आ रही है।
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जल्द होगी शिकायत
फर्जी रकबा पंजीयन और बोगस धान खरीदी में सम्बन्धित किसान, हल्का पटवारी और खरीदी केंद्र के जिम्मेवार कर्मचारियों की मिलीभगत रहती है। ऐसे फर्जी रकबा पंजीयन कराने वालों के विरुद्ध जिला प्रशासन के साथ साथ केंद्र एवं राज्य सरकार दोनों से शिकायत करने की खबर मिल रही है।


