कोरबा – फर्जी तरीके से मृत व्यक्ति के नाम की गाड़ी को फाइनेंस कंपनी और परिवहन कार्यालय में पदस्थ अधिकारियों – कर्मचारियों ने मिलीभगत कर भ्रष्टाचार को अंजाम दिया है जिसकी लिखित शिकायत होने के बाद मामला तुल पकड़ता हुआ नजर आ रहा है। इस मामले में विभागीय दस्तावेजों ने फर्जीवाड़े की पोल खोल दी है। सच्चाई सामने आने के बाद शिकायतकर्ता को एक बार न्याय मिलने की उम्मीद जाग गई है। फर्जीवाड़े के खिलाफ जल्द ही बड़ी कार्रवाई होने की संभावना जताई जा रही है।
पिछले दिनों हमने खबर के माध्यम से जिला परिवहन कार्यालय कोरबा में पदस्थ प्रभारी डीटीओ विवेक सिन्हा, शाखा प्रभारी विकास ठाकुर एवं कथित आरटीओ एजेंट लाल राठौर सहित फाइनेंस कंपनी द्वारा मिली भगत कर मृत व्यक्ति की गाड़ी को गलत तरीके से नाम ट्रांसफर करने की शिकायत पर खबर प्रकाशन किया था जिसकी शिकायत प्रदेश स्तर तक हुई थी जिसकी प्रतिलिपि स्वयं डीटीओ को भी दिया गया था। लेकिन डीटीओ ने प्रतिलिपि होने की बाद कहकर जांच करने के बजाय टालना सही समझा।
परिवहन कार्यालय के सरकारी काम में अनाधिकृत लोगों का दखल खुलेआम, DTO की मौन स्वीकृति?
भ्रष्टाचार में घिरी सौम्या चौरसिया की जमीन-जायदाद कुर्क, ईडी का शिकंजा
प्रभारी डीटीओ द्वारा मामले को दबाने पूरी एड़ी चोटी लगा दी गई। लेकिन कहावत है “सत्य परेशान हो सकता है लेकिन पराजित नहीं हो सकता”। इस मामले में भी ठीक ऐसा ही हो रहा है। भ्रष्टाचार में डूबा परिवहन कार्यालय अपने हरकतों से बाज नहीं आ रहा है जिसके कारण भ्रष्टाचार को अंजाम देने के लिए तरह-तरह के पैंतरे अधिकारी द्वारा अपनाए जा रहे हैं और आम लोगों को परेशान करने की नियत से स्वेच्छाचारिता करते हुए सरकारी कार्यालय को ही दो भागों में बांट दिया है। लेकिन सच तो सच होता है और बुरे काम का बुरा नतीजा भी होता है। अब इस मामले में भी फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ जल्द ही बड़ी कार्रवाई होने की संभावना है।
अमित शाह 4 अक्टूबर को करेंगे छत्तीसगढ़ का दौरा, आदिवासी संस्कृति से होंगे रूबरू
सैयां भए कोतवाल तो डर काहे का
इस पूरे दृश्य को देखकर ऐसा लग रहा है कि जिला परिवहन अधिकारी खुद ही भ्रष्टाचार को कराना चाहते हैं। शायद यही कारण है कि कार्यालय के बाहर संचालित अवैध दुकानदारों से साठ – गांठ कर उन्हें संरक्षण देने में भी कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। ऐसे में लोगों का यह भी कहना है कि जब अधिकारी ही भ्रष्टाचार में लिप्त हो तो शिकायत पर कार्यवाही ही क्या हो सकता है और डर किस बात की।
ACB-EOW की बड़ी कार्रवाई: छत्तीसगढ़ में सौम्या चौरसिया की 8 करोड़ की संपत्ति कुर्क
बाबू के सामने कथित एजेंट लगा रहा दस्तावेज में शील?
परिवहन कार्यालय कोरबा फर्जीवाड़े का गढ़ बन गया है जिसके कई मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। नोट लेते हुए वीडियो खूब चर्चा में रहा वहीं जिम्मेदार कर्मचारियों द्वारा असिस्टेंट बनाकर सरकारी गोपनीयता को भी भंग करने में नहीं चुके और दूसरों को कंप्यूटर में बैठ कर ओटीपी भी पास करते रहे। ठीक ऐसा ही एक और वीडियो सामने आया है जिसमें कार्यालय का चर्चित बाबू अपने केबिन अंदर कथित एजेंट को बैठाकर सरकारी सरकारी दस्तावेज में शील लगा रहा है।
कोरबा: जनपद पंचायत के CEO के रूप में आईएएस क्षितिज गुरभेले को जिम्मेदारी
सुशासन सरकार में अधिकारी की मनमानी
सुशासन सरकार में भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार के पास शिकायतें पहुंचने के बाद भी कार्रवाई नहीं होने के कारण अब सुशासन सरकार से भी लोगों का भरोसा उठाना शुरू हो गया है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण भाजपा सरकार में लगातार कैबिनेट मंत्री रहे पूर्व विधायक एवं गृह मंत्री ननकी राम कंवर द्वारा कोरबा कलेक्टर को हटाने अपने ही सरकार के खिलाफ आवाज उठाते हुए मुख्यमंत्री को दिए गए अल्टी मेटम पत्र को मान सकते हैं। सूत्रों की माने तो लोगों का कहना है कि इसका खामियाजा आने वाले चुनाव में भुगतना पड़ सकता है। सूत्रों का यह भी कहना है कि कहीं सरकार की कुर्सी ही ना चली जाए।


