सक्ती – छत्तीसगढ़ के नवगठित जिले में 21 करोड़ से भी अधिक का धान गायब हो गया लेकिन जिम्मेदार अधिकारी दोषियों पर आज तक कार्यवाही करने के बजाय मौन है। शिकायतकर्ता का दावा है कि भ्रष्टाचार की शुरुवात होने की खबर मिलते ही तीनों संग्रहण केंद्र की जांच करने तत्कालीन कलेक्टर सहित DMO से शिकायत की गई लेकिन जिम्मेदार अधिकारी ने जांच ना कर शिकायत को फाइल में दबा दिया जिसका प्रमाण मौजूद है।

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इस पूरे मामले ने सक्ती जिले में प्रदेश की सुशासन सरकार के दावों की धज्जियां उड़ा दी है। अब सवाल है कि 21 करोड़ का धान किसने गबन किया? इस भ्रष्टाचार में लिप्त कौन है? इसकी जांच क्यों नहीं की गई? जांच होने के बजाय जिम्मेदार की मौन स्थिति के मायने क्या थे?

आपको बता दें सक्ती जिले में बीते वर्ष धान खरीदी वर्ष 2024 – 25 की शुरुवात से ही संग्रहण केंद्र में धान का भंडारण किया गया था जिसमें सक्ती, डभरा और बोड़ासागर शामिल है। इस धान की सुरक्षा के लिए लाखों रुपए खर्च भी किए गए लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि करोड़ों रुपए का धान गायब हो गया।

सूत्रों का दावा है कि इन तीनों संग्रहण केंद्र के प्रभारी अरुण कुमार भूपाल (सक्ती), उत्तम चंद्रा (बोड़ा सागर) और विवेक पटेल (डभरा) सहित सभी केंद्र के कंप्यूटर ऑपरेटर ने मिलकर 21 करोड़ रुपए से भी अधिक के धान को गबन कर दिया और जब मामला सामने आया तो सभी ने बचाव के लिए सुपेज बोरियों की कहानी रच डाली जिसमें विभागीय संरक्षण मिलने का दावा किया गया है।

इस पूरे मामले में विभाग के मुखिया DMO शोभना तिवारी तक शिकायत पहुंची लेकिन अधिकारी ने स्वेच्छा चारिता करते हुए इस गंभीर मामले को ठंडे बस्ते में डालकर भ्रष्टाचारियों को संरक्षण दे दिए। शायद यही कारण है कि आज भी निष्पक्ष जांच की मांग हो रही है।

पूरे घोटाले की कहानी उस वक्त शुरू हुई जब खरीदी केन्द्रों में धान नहीं मिला और सूची में धान का परिधान होना शेष था। DMO कार्यालय से बार -बार उठाव हेतु शेष धान का परिदान करने सूची भी जारी किया गया था जो कि पुख्ता सबूत भी है।

सूत्रों की माने तो सूची जारी होने के बाद सभी बकाया समितियों के प्रभारी ने अपने संबंधित संग्रहण केंद्र प्रभारी से मिलकर पैसे का लेनदेन शुरू कर दिए जो आज 21 करोड़ रुपए का महा घोटाला बन गया है।
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जांच के मुख्य बिंदु
1 मार्च 2025 से 30 अप्रैल 2025 तक जिन समितियों से बकाया धान का परिदान किया गया है उसके सभी रिकार्ड की छानबीन की जाए। आवक तौल पर्ची से लेकर खाली गाड़ी और लोड गाड़ी की पर्ची एवं बोरियो की संख्या का मिलान आवश्यक है।
इसके अलावा संग्रहण केंद्र से उठाओ किए गए धान की मात्रा, गाड़ी नंबर, तौल पर्ची, धान की बोरियों की संख्या, खाली गाड़ी एवं लोड गाड़ी का तौल पर्ची इन सभी दस्तावेजों की जांच होनी चाहिए
सबसे महत्वपूर्ण बात यह भी है कि सुपेज बोरियों की जो बात कही जा रही है उसकी सच्चाई आखिरकार क्या है? इसकी भी जांच होनी चाहिए क्योंकि सभी समितियों से शत प्रतिशत धान की प्राप्ति संग्रहण केंद्र प्रभारी द्वारा की गई है जिसके प्रमाण पत्र भी जारी किए गए हैं।
इस पूरे मामले में संलिप्त सभी दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए एक बार फिर केंद्रीय कृषि मंत्री और जिले के नए कलेक्टर से शिकायत करते हुए कार्रवाई करने मांग की जाएगी।


