जांजगीर चांपा – जिले में मुख्यमंत्री के विभाग में ही भ्रष्टाचार का दीमक पलने लगा है। हालात ऐसे हैं कि ठेका कर्मचारियों से उनका हक छीना जा रहा है और जिम्मेदार अधिकारी ठेकेदार के सामने घुटने टेकते नजर आ रहे हैं।
ताजा मामला छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कम्पनी लिमिटेड चाम्पा जोन का है। यहां जान को जोखिम में डालकर FOC का कार्य करने वाले ठेका मजदूरों के वेतन में कमीशनखोरी का खेल चल रहा है। ठेकेदार टिकेश्वर कश्यप पिछले कई महीनों से सभी मजदूरों के वेतन में बट्टा मार रहा है और निर्धारित वेतन में हर महीने लगभग 5000 का बट्टा मार रहा है।
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इन मजदूरों के वेतन का हिसाब किया जाए तो ठेकेदार टिकेश्वर कश्यप द्वारा सिर्फ चांपा जोन में ही एक साल में ही लगभग 12 लाख रुपए से ज्यादा का भ्रष्टाचार कर चुका है जिसका सही आंकड़ा निकालने पर लगभग 50 लाख रुपए से भी ज्यादा का घोटाला सामने आ सकता है।
सूत्रों की माने तो ठेकेदार टिकेश्वर कश्यप जांजगीर के अलावा अन्य सीमावर्ती जिलों में भी कर्मचारी नियुक्त किया हुआ है जिनके वेतन में भी कमीशन का खेल किया जा रहा है।
सूत्रों का यह भी दावा है कि ठेकेदार टिकेश्वर कश्यप द्वारा चलाया जा रहा यह एक सिंडिकेट है जिसमें विभाग के जिम्मेदार लोगों की मिलीभगत है।
इस पूरे मामले की जांच करने शिकायत दर्ज कराई गई थी लेकिन चाम्पा जोन के सहायक अभियंता और कार्यपालन अभियंता ने जांच को ही प्रभावित कर दिया, मानो ठेकेदार को इनकी मौन स्वीकृति प्राप्त हो या फिर माया के सामने घुटने टेक दिए हों।
सूत्रों से खबर मिल रही है कि किसी बाबू के द्वारा ठेका कर्मचारियों को जबरन एक फॉर्म में हस्ताक्षर करने दबाव दिया जा रहा है। शायद यही कारण है कि कल तक कर्मचारियों को पिछले महीने का वेतन भी नहीं दिया गया है।
जिम्मेदार अधिकारी इस बात को कैसे भूल रहे हैं कि यह विभाग सीधे मुख्यमंत्री के कमान में है और इसकी शिकायत मुख्यमंत्री से हो सकती है जिसके सभी साक्ष्य भी है जिसमें ठेकेदार द्वारा कर्मचारियों के खाते में भेजा गया वेतन, बैंक स्टेटमेंट और मस्टर रोल प्रमुख है।
11 सितंबर को मुख्यमंत्री का शक्ति जिले में दौरा है। जल्द ही इस मामले की लिखित शिकायत मुख्यमंत्री से सीधे की जाएगी और कार्यवाही की मांग की जाएगी। इसके अलावा मुख्यमंत्री हेल्प लाइन में भी शिकायत होने की खबर है।
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अब देखना होगा कि क्या ठेकेदार को संरक्षण देने वाले अधिकारी अपने कार्यवाही की कलम को चलाएंगे या फिर खुद निलंबित होने के लिए तैयार रहेंगे क्योंकि ठेका कर्मचारियों को पूर्ण वेतन दिलाने की जवाबदारी जिम्मेदार अधिकारियों को भी है।
मामले की शिकायत भी हो गई है फिर भी अधिकारियों की चुप्पी उनकी मौन स्वीकृति को दर्शाता है।


