कोरबा – भ्रष्टाचार में लिप्त कुसमुंडा प्रबंधन की मनमानी किसी से छुपी नहीं है। प्रबंधन अपने चहेतो को लाभ पहुंचाने किसी भी हद तक गिर सकते हैं जिसके कई उदाहरण भी सामने आया है।
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इसी बीच कुसमुंडा खदान में कर्मचारियों के साथ शोषण करने का बड़ा मामला सामने आया है जिसमें अधिकारी की स्वेच्छा चारिता स्पष्ट नजर आ रही है। जिले के SECL कुसमुंडा खदान में मजदूरों के मूलभूत सुविधाओं के साथ – साथ उनके कार्यों में मिलने वाले अधिकारों के शोषण के खिलाफ श्रमिक संगठन ने कुसमुंडा प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
क्या SECL प्रबंधन चोरी में लिप्त? देखें वीडियो
इस आंदोलन में भारतीय कोयला खान मजदूर संघ ने प्रबंधन को कई बार पत्राचार करते हुए श्रमिकों के हित में उचित कदम उठाने मांग किया था। लेकिन प्रबंधन ने उनकी मांगों पर कोई कार्यवाही नहीं किया जिसके कारण श्रमिक संगठन बाध्य होकर अब आंदोलन करने मजबूर हो गए हैं।
दूसरी तरफ कुसमुंडा प्रबंधन श्रमिक संगठन के मांगो पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं कर पा रही है और ना ही इसमें चर्चा कर रही है। आखिर क्यों प्रबंधन चुप है? ऐसी क्या मजबूरी है कि श्रमिकों के हित के खिलाफ लिया गया फैसला वापस नहीं ले पा रहे हैं। इसके पीछे की सच्चाई को देखें तो पता चलता है कि जिस बस से कर्मचारियों को लाया एवं ले जाया जा रहा है वह मुखिया का सबसे करीबी है जिसे खुली छूट भी दी गई है जिसके कारण ही आज खदान में 13 साल की कबाड़ बस चल रही है। अधिकारी इतने बेशर्म हो चुके है कि उनके जहन में जू तक के नहीं रेंग रहा है, क्योंकि उन्हें पता है कि सच क्या है।
भारतीय कोयला खदान मजदूर संघ, कोरबा कुसमुंडा के महामंत्री रंजय सिंह ने 30 अप्रैल 2026 को मुख्य महाप्रबंधक SECL कुसमुंडा क्षेत्र को पत्राचार करते हुए चरण बद्ध आंदोलन करने सूचना दी थी जिसमें 13 बिंदुओं पर मांग रखा है।
आंदोलन के प्रथम चरण में 15 मई 2026 से 17 मई 2026 तक सभी समयपाल में जाकर गेट मीटिंग करना था। दूसरे चरण में आज 18 मई 2026 को महाप्रबंधक कार्यालय के सामने विशाल धरना प्रदर्शन, तीसरे चरण में 27 मई 2026 को काम रोको आंदोलन और चौथे चरण में 01 जून 2026 को अनिश्चित कालीन भूख हड़ताल करने की चेतावनी दी है।
मगर अफसोस की बात है कि जिन कर्मचारियों के कंधे पर उत्पादन का जिम्मा होता है आज उन्हीं कर्मचारियों के हित के लिए श्रमिक संगठन में एकता नजर नहीं आ रही है जबकि मजदूरों के लिए श्रमिक संगठन ही उनके लिए एक वकील जैसा काम करते हैं और उनके साथ हो रहे अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाकर उन्हें उनका हक दिलाते हैं। लेकिन इस आंदोलन में अन्य संगठनों ने चुप्पी साध की है। ऐसे में चर्चा हो रही है कि क्या यह आंदोलन श्रमिकों के हित के विपरीत है या फिर अपने संबंधो को बनाए रखने के लिए मौन है। यह सवाल उन कर्मचारियों का है जिन्हें उम्मीदें हैं।
ये है प्रमुख मांगे….



