कोरबा : जिला पंचायत कार्यालय सोमवार को उस समय राजनीतिक सरगर्मियों का केंद्र बन गया, जब जिला पंचायत अध्यक्ष पवन सिंह सहित कई जनप्रतिनिधि जिला पंचायत परिसर में धरने पर बैठ गए। जनप्रतिनिधियों ने जिला पंचायत सीईओ दिनेश कुमार नाग पर मनमानी कार्यशैली, जनप्रतिनिधियों की अनदेखी और विकास कार्यों में पारदर्शिता नहीं बरतने जैसे गंभीर आरोप लगाए। जानकारी के अनुसार जिला पंचायत अध्यक्ष पवन सिंह ने विभिन्न विकास कार्यों और योजनाओं को लेकर जनपद सदस्यों की बैठक बुलाई थी। बैठक में जिला पंचायत सीईओ दिनेश कुमार नाग को भी उपस्थित रहने के लिए कहा गया था, लेकिन करीब तीन घंटे तक इंतजार करने के बावजूद उनके नहीं पहुंचने पर जनप्रतिनिधियों का गुस्सा फूट पड़ा। नाराज सदस्यों ने जिला पंचायत परिसर में धरना शुरू कर दिया और सीईओ के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
हाईवे पर अव्यवस्थित ट्रेलरों पर पाली पुलिस का सख्त एक्शन, 7 वाहनों पर हुई कार्रवाई
धरने के दौरान अध्यक्ष पवन सिंह ने कहा कि लगातार जनप्रतिनिधियों की शिकायतों को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिला पंचायत में निर्वाचित प्रतिनिधियों की राय को महत्व नहीं दिया जा रहा और प्रशासनिक स्तर पर एकतरफा फैसले लिए जा रहे हैं। इससे क्षेत्रीय विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं और जनता की अपेक्षाएं अधूरी रह जा रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि जनप्रतिनिधियों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया और उनकी बातों को इसी तरह अनसुना किया जाता रहा, तो सभी सदस्य इस्तीफा देने तक के लिए मजबूर हो सकते हैं।
जुलाई से मजदूरों को बड़ी राहत, अब मिलेगा 125 दिन रोजगार का गारंटी लाभ
धरने पर बैठे सदस्यों ने डीएमएफ फंड के उपयोग को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि जनता के विकास के लिए मिलने वाली राशि के उपयोग में पारदर्शिता नहीं दिखाई दे रही है। कई सदस्यों ने आरोप लगाया कि योजनाओं के चयन और स्वीकृति प्रक्रिया में जनप्रतिनिधियों को विश्वास में नहीं लिया जाता, जिससे उनकी भूमिका केवल औपचारिक बनकर रह गई है। जिला पंचायत अध्यक्ष ने विकास कार्यों में कथित कमीशनखोरी के आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग भी की। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों की उपेक्षा गंभीर विषय है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। धरने के चलते जिला पंचायत परिसर में काफी देर तक गहमागहमी का माहौल बना रहा। भाजपा समर्थित सदस्यों ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासनिक कार्यप्रणाली में सुधार नहीं हुआ, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इस घटनाक्रम के बाद जिला पंचायत की कार्यप्रणाली और डीएमएफ फंड के उपयोग को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।


