बिलासपुर : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र रेलवे की गतिविधियों में अचानक आई तेजी अब चर्चा का विषय बन गई है। मतदान में महज कुछ दिन शेष रहने के बीच यात्रियों—खासकर दूसरे राज्यों में काम करने वाले मतदाताओं—की सुविधा के लिए विशेष ट्रेनों का संचालन शुरू किया गया है। हालांकि रेलवे ने इसे आधिकारिक तौर पर चुनाव से नहीं जोड़ा है, लेकिन ट्रेनों की टाइमिंग और रूट को देखते हुए इसे चुनावी रणनीति के नजरिए से भी देखा जा रहा है। पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को मतदान होना है। ऐसे में बड़ी संख्या में प्रवासी मतदाता अपने गृह राज्य लौट सकें, इसके लिए रेलवे ने व्यापक स्तर पर तैयारी की है। बिलासपुर जोन से होकर कुल 16 स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं। इनमें कुछ ट्रेनें पहले से समर वेकेशन के नाम पर शुरू हो चुकी थीं, जबकि अधिकतर ट्रेनों का संचालन मतदान से 2 से 4 दिन पहले तय किया गया है।
रेलवे ने खास तौर पर कुछ महत्वपूर्ण रूट्स पर ध्यान केंद्रित किया है
पुणे–एलटीटी–वलसाड रूट: यहां से सांतरागाछी और खड़गपुर के लिए विशेष ट्रेनें चलाई जा रही हैं, जिससे महाराष्ट्र और गुजरात में रहने वाले मतदाता समय पर अपने घर पहुंच सकें।
दुर्ग–गोंदिया–इतवारी रूट: बिलासपुर जोन की ये ट्रेनें स्थानीय स्तर पर बंगाल जाने वाले यात्रियों के लिए अहम कड़ी साबित हो रही हैं।
पटना–रक्सौल कॉरिडोर: इन ट्रेनों के जरिए मालदा, दिनाजपुर, वीरभूम और हल्दिया जैसे चुनावी दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्रों के मतदाताओं को सुविधा देने की कोशिश की गई है।
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रद्द ट्रेनें बहाल, नई सेवाएं भी शुरू
चुनाव के बीच रेलवे ने कुछ अहम फैसले भी लिए हैं। गोंदिया में वॉशेबल एप्रन के काम के चलते ‘शालीमार–एलटीटी एक्सप्रेस’ को 24 अप्रैल तक रद्द किया गया था, लेकिन 29 मार्च को अचानक नया आदेश जारी कर इसे बहाल कर दिया गया। इसके अलावा, ‘शालीमार–इतवारी’ के बीच नई साप्ताहिक ट्रेन की शुरुआत भी की गई है, जिससे यात्रियों को अतिरिक्त विकल्प मिल सके।
हावड़ा रूट, जो लंबे समय से देरी के लिए बदनाम था, अब अचानक समय पर चलने लगा है। बिलासपुर जोन से गुजरने वाली कई ट्रेनें पिछले एक सप्ताह से “राइट टाइम” पर चल रही हैं। इसे भी चुनावी तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है, ताकि मतदाता बिना किसी परेशानी के अपने गंतव्य तक पहुंच सकें।


