सक्ती – धान खरीदी केंद्र में कौन परेशान है? धान खरीदी केंद्र में शॉर्टेज की भरपाई कौन करता है? धान खरीदी केंद्र में उठाओ की लेटलतीफी को लेकर जिम्मेदार कौन है? इस बात की जिक्र अक्सर नहीं होती है। लेकिन धान खरीदी का प्रभाव और परेशानी इसी से जुड़ा हुआ है जो की सच है।
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पूरे प्रदेश भर में धान खरीदी 15 नवंबर से शुरू हो चुकी है। सक्ती जिला एवं सीमावर्ती जिला कोरबा में भी धान खरीदी जोरों पर चल रही है। देश के अन्नदाता किसान भाइयों ने अपनी मेहनत और लगन से उपजाए फसल को मंडियों में लाकर समर्थन मूल्य पर धान का विक्रय कर रहे हैं और सरकार द्वारा बेचे गए धान का समर्थन मूल्य 24 से 48 घंटे के भीतर सीधे उनके खाते में भेजी जा रही है।
धान खरीदी शुरू होते ही गलियारे में यह चर्चा जरूर होती है कि अब मंडियों में धान की हेरा – फेरी शुरू हो जाएगी। लेकिन कुछ खरीदी केंद्रों को अगर छोड़ दिया जाए तो अधिकांश खरीदी केदो में खरीदी प्रभारी / फड़ प्रभारी, संस्था प्रबंधक सहित पूरी समिति के सदस्यों की समस्या बढ़ जाती है जिसको लेकर ना ही स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग चिंता कर रही है और ना ही सरकार। लेकिन समिति को बचाने के लिए इसकी चिंता करना जरूरी है।
समर्थन मूल्य पर धान खरीदी सरकार की महत्वपूर्ण योजना है। इस कार्य के लिए सरकार ने किसानों के हित के लिए नियम बनाया है कि 17% तक नमी वाले धान की खरीदी करना है जिसका पालन भी समितियों में किया जा रहा है। समितियों में ऐसे धान की खरीदी कर स्टेकिंग करके रखता है और उठाओ होने का इंतजार करता है।
लेकिन खरीदी केंद्र प्रभारियों की पीड़ा यही से शुरू होती है। जिम्मेदार विभाग धान उठाओ को लेकर डी.ओ. तो जारी कर दे रहे है लेकिन मिलरों द्वारा समय पर धान उठाओ नहीं किया जा रह है जिससे समस्याएं बढ़ने लगी है, धान सूखने लगा है जिससे वजन में कमी आने लगी है। आखिरकार मिलरों पर उठाव के लिए कोई कार्यवाही क्यों नहीं हो रही है?
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प्रदेश के कई जिले के अधिकांश मंडियों में शेड नहीं बने होने के कारण खुले में धान रखना मजबूरी बन गया है। ऐसी स्थिति कोरबा और सक्ती जिले में भी है। वर्तमान में कड़ाके की धूप के कारण जहां इंसान ज्यादा समय तक बाहर खड़े नहीं हो पा रहा है वहीं इस तपती धूप में 17 प्रतिशत नमी में खरीदी किया गया धान सूख कर अब 10, 11 और 12 प्रतिशत हो जा रहा है जिससे वजन भी घटने लगा है। इस कमी को आखिरकार कौन भरपाई करेगा? इसकी चिंता और चर्चा क्यों नहीं हो रही है।
ठीक इसी तरह बगैर चबूतरा के भी कई समितियों में धान की बोरियों को स्टेकिंग किया जा रहा है जिसको सुरक्षित रखने के लिए ड्रेनेज सिस्टम भी बनाया गया है जिसमें भूसी से भरी बोरियों को पहले बिछाया जाता है फिर धान की बोरियों को स्टेकिंग किया जाता है। लेकिन इन धान की बोरियों को चूहा और किट काट रहे हैं और नुकसान भी कर रहे हैं जिससे धान की मात्रा में कमी आ रही है जिसका सीधा नुकसान समिति को हो रहा है, बारदाने भी खराब हो रहे हैं। ऐसे में धान की बोरियों को सुरक्षित रखने के लिए शेड और चबूतरा बनाया जाना बहुत ही आवश्यक है लेकिन इसकी चर्चा आखिर कोई क्यों नहीं कर रहा है।
धान मंडियों की यह असली सच्चाई है जो किसी से छुपी नहीं है। लेकिन इस पर चर्चा परीचर्चा ना तो किया जा रहा है और ना ही इस समस्या का हल निकाला जा रहा है। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि धान खरीदी शुरू होने के बाद लगातार स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग के अधिकारियों का दौरा हर खरीदी केंद्रों में होता रहता है और वे सभी स्थिति परिस्थिति से भी पूरी तरह रूबरू रहते हैं। ऐसे में समस्याओं का हल नहीं हो पाना आखिरकार क्या दर्शाता है?
डी.ओ. जारी किए गए मिलरों पर जिम्मेदार विभाग को सख्त होने की जरूरत है ताकि सरकार के महत्वपूर्ण कार्य को सही समय पर किया जा सके और अन्नदाता किसानों को उनके मेहनत के एक-एक दाने का मूल्य मिल सके और इस महत्वपूर्ण कार्य को संपन्न करने वाले समिति के कर्मचारियों को भी समस्या से निजात मिल सके।
72 घंटे में उठाव की शर्त भी खत्म
सभी धान खरीदी केंद्रों में बफर लिमिट मानक निर्धारित करते हुए शेष धानों के उठाओ को लेकर 72 घंटे में उठाओ अनिवार्य है ऐसी शर्तें लागू की गई थी, हालांकि इन शर्तों का पालन नहीं होता था लेकिन अब शासन ने इसे भी खत्म कर दिया है।
सुखद की मांग
प्रदेश भर के सभी सोसाइटी में कर्मचारियों द्वारा धान को उठाओ में हो रही लेट लतीफ को लेकर 01 प्रतिशत सुखद देने की मांग की गई थी। लेकिन सरकार ने इस पर भी विचार ना करते हुए उन्हें सुखद का लाभ नहीं दिया जिसके कारण उठाओ में हो रही लेट लतीफ से वजन कम होने का ख़ामियाजा इन्हीं को झेलनी पड़ रही है।
उठाव में तेजी लाने करें कार्यवाही
समिति कर्मचारियों का कहना है कि धान के उठाओ के लिए विभाग द्वारा डी.ओ. तो जारी कर दिया गया है लेकिन संबंधित मिलरों के द्वारा लेट लतीफी की जारी है जिसके कारण उठाओ में तेजी नहीं आ पा रही है और फड़ में धान रखने की व्यवस्था नहीं है जिसके कारण अव्यवस्था बनी हुई है। ऐसे में अधिकारियों को मिलरों पर सख्त कार्रवाई करते हुए उठाव में तेजी लाने कार्य करने की जरूरत है ताकि फड़ में धान खरीदी कार्य व्यवस्थित ढंग से हो सके।


