सक्ती – के.सी.सी. लोन में भ्रष्टाचार की पाठशाला चलाने वाले जिला सहकारी केंद्रीय मर्यादित बैंक के सुपरवाइजर गजानंद राव की डभरा वापसी ने जिला सहकारी केंद्रीय बैंक सिस्टम के निष्पक्षता को एक बार फिर कटघरे में लाकर रख दिया है। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के डभरा, चंद्रपुर और मालखरौदा शाखा की चर्चा जिले में पहले से ही है। यहां लंबे समय से पदस्थ सुपरवाइजर जी.पी.राव ने अपने पद एवं अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए अपने कर्तव्य आचरण के विपरीत स्वेच्छा चारिता करते हुए कई समिति में के.सी.सी. ऋण में भारी भ्रष्टाचार किया है।
NH-30 पर ट्रक हादसा: आमने-सामने टकराए दो वाहन, 3 की मौत
सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा डभरा शाखा अंतर्गत सेवा सहकारी समिति देवरघटा और बड़े कटेकोनी में किया है। इन दोनों समितियों में देवरघटा के तत्कालीन संस्था प्रबंधक वर्तमान धान खरीदी प्रभारी देवरघटा कोमल चंद्रा और बड़े कटेकोनी प्रभारी संस्था प्रबंधक और खरीदी प्रभारी ऋतुराज गबेल का नाम सबसे आगे है।
इन समितियों द्वारा बैंक में प्रस्तुत केसीसी ऋण के लिए दिए गए दस्तावेजों के परीक्षण निरीक्षण में सुपर वाइजर (पर्यवेक्षक) जी पी राव द्वारा घोर लापरवाही किया था। बताया जा रहा है कि दोनों ही समिति में संस्था प्रबंधक, कंप्यूटर ऑपरेटर और सुपरवाइजर ने जमकर भ्रष्टाचार किया है और अपात्र होते हुए भी अधिक लोन देकर अपने चहेते लोगों को उपकृत करने का कार्य किया है। लिमिट को भी दरकिनार करते हुए लोन दिया गया है।
देवरघटा समिति में तत्कालीन संस्था प्रबंधक कोमल चंद्रा ने स्वयं के नाम से फर्जी के.सी.सी. ऋण निकालकर भ्रष्टाचार को अंजाम दिया है जिसका दस्तावेजीय प्रमाण होने के बावजूद कार्यवाही करने के बजाय जांच अधिकारियों द्वारा उन्हें अभय दान दिया जा रहा है। इसी तरह अपने रिश्तेदारों को भी खुली छूट देते हुए भ्रष्टाचार किया है।
आज का मौसम: प्रदेश में ठंड-गर्मी का खेल जारी, कुछ इलाकों में तापमान में गिरावट
कोमल चंद्रा का फर्जीवाड़ा
सेवा सहकारी समिति देवरघटा पंजीयन क्रमांक – 1551 में समिति के कार्यवाही पंजी में कोमल प्रसाद चंद्रा पिता लखनलाल के नाम पर खरीफ वर्ष 2024 – 25 में कुल रकबा 8.624 हेक्टेयर के अनुसार 2,90,000/- (दो लाख नब्बे हजार रूपये) स्वीकृत किया गया है। परंतु कोमल चंद्रा द्वारा पिछले तीन वर्ष 2022 – 23, 2023 – 24 और 2024 – 25 में क्रमशः 3.668 हे., 3.668 हे. तथा 3.599 हेक्टेयर भूमि पंजीयन कर धान बिक्री किया है। बैंक के नियमानुसार प्रति हेक्टेयर 60000/- (साठ हजार रुपए मात्र) नगदी और वस्तु के लिए प्रावधान था जिसमें 60 प्रतिशत नगदी और 40 प्रतिशत वस्तु निर्धारित था। इसके अलावा वर्ष 2024 – 25 के सीमा पत्रक /NCL रिपोर्ट में कोमल प्रसाद चंद्रा पिता लखनलाल के नाम पर कुल रकबा 7.854 के अनुसार प्रधान कार्यालय से स्वीकृत कुल राशि नगदी ऋण 132048/- एवं वस्तु ऋण 88032/- कुल 220080/- (दो लाख बीस हजार अस्सी रुपए मात्र ) दर्ज है। इस तरह पंजीयन रकबा और सीमा पत्रक /NCL रिपोर्ट तथा कार्यवाही पंजी में दर्ज रकबा में भिन्नता है जो कि फर्जीवाड़े को स्पष्ट कर रहा है।
धान खरीदी प्रभारी के खिलाफ हुआ एफ.आई.आर., 89 लाख का मामला
लखन लाल चंद्रा को मिला फर्जीवाड़ा का लाभ
सेवा सहकारी समिति देवरघटा पंजीयन क्रमांक – 1551 में समिति के कार्यवाही पंजी में लखनलाल चंद्रा पिता जगन्थिया के नाम पर खरीफ वर्ष 2024 – 25 में रकबा 7.957 के अनुसार 2,75,000/- (दो लाख पचहत्तर हजार रूपये) स्वीकृत किया गया है। परंतु लखनलाल चंद्रा द्वारा पिछले तीन वर्ष 2022 – 23, 2023 – 24 और 2024 – 25 में क्रमशः 2.362 हे., 2.362 हे. तथा 2.233 हेक्टेयर भूमि पंजीयन कर धान बिक्री किया है। बैंक के नियमानुसार प्रति हेक्टेयर 60000/- (साठ हजार रुपए मात्र) नगदी और वस्तु के लिए प्रावधान था जिसमें 60 प्रतिशत नगदी और 40 प्रतिशत वस्तु निर्धारित था। इसके अलावा वर्ष 2024 – 25 के सीमा पत्रक /NCL रिपोर्ट में लखनलाल चंद्रा पिता श्री जगन्थिया के नाम पर कुल रकबा 2.362 के अनुसार नगदी ऋण 85032/- एवं वस्तु ऋण 56688/- कुल 141720/- (एक लाख इकतालीस हजार सात सौ बीस रुपए मात्र) दर्ज है। इस तरह पंजीयन रकबा और सीमा पत्रक /NCL रिपोर्ट तथा कार्यवाही पंजी में दर्ज रकबा में भिन्नता है जो कि फर्जीवाड़े को स्पष्ट कर रहा है।
इस पूरे फर्जी वाले का मुख्य सरगना पर्यवेक्षक जी.पी.राव है। इसके संरक्षण में ही यह सब कुछ संभव हुआ है क्योंकि बैंक की सहमति के बाद ही आगे की कार्यवाही होती है। इसके अलावा प्रभारी संस्था प्रबंधक कोमल चंद्रा और कंप्यूटर ऑपरेटर की भी मिलीभगत थी। ऐसे भ्रष्टाचारियों को दोबारा बैंक में वापस लेकर अहम जिम्मेदारी दिया जाना भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने जैसा लग रहा है। जल्द ही शिकायत करते हुए हटाने की मांग की जाएगी और जांच करते हुए कार्रवाई करने की भी मांग की जाएगी।


