स्वामी विवेकानंद. आज स्वामी विवेकानंद की पुण्यतिथि है। उन्हें आधुनिक भारत के आध्यात्मिक पुनर्जागरण का अग्रदूत कहा जाता है। उनकी गहरी शिक्षाओं और अद्भुत जीवनदर्शन ने करोड़ों लोगों की सोच को बदल दिया। लेकिन क्या आपको पता है कि स्वामी विवेकानंद को अपनी मृत्यु का पूर्वाभास था?
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कहा जाता है कि वे अपने शिष्यों से बार-बार कहते थे – “मैं 40 की उम्र तक जीवित नहीं रहूंगा।” उनके इस कथन को सुनकर लोग चकित हो जाते थे। विवेकानंद को लगता था कि उनका जन्म किसी खास उद्देश्य के लिए हुआ है – भारत को आध्यात्मिक रूप से जागृत करने और वेदांत दर्शन को पूरी दुनिया में फैलाने के लिए।
4 जुलाई 1902 को महज 39 साल की उम्र में उन्होंने यह देह त्याग दी। उनके शिष्यों के अनुसार, उस दिन उन्होंने सामान्य से कहीं ज्यादा देर तक साधना और ध्यान किया। वे पूरी तरह शांत और संतुष्ट दिखाई दे रहे थे। कुछ लोगों का मानना है कि उन्होंने महासमाधि की अवस्था में शरीर छोड़ा – यानी योगियों की वह स्थिति जब वे सचेतन रूप से प्राण त्यागते हैं।
स्वामी विवेकानंद ने कम उम्र में ही इतना कुछ कर दिखाया, जितना लोग पूरी जिंदगी में नहीं कर पाते। उनके विचार, उनके भाषण और उनके आदर्श आज भी नई पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बने हुए हैं। भारत को जाग्रत करने का उनका सपना अब भी हर युवा के दिल में जलता दीपक है।
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