नई दिल्ली/पटना, 9 जुलाई 2025। बिहार में वोटर लिस्ट के सत्यापन को लेकर राजनीतिक घमासान अब सुप्रीम कोर्ट की चौखट तक पहुंच गया है। इस मुद्दे पर आज देश की शीर्ष अदालत में महत्वपूर्ण सुनवाई हो रही है।
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कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) समेत इंडिया गठबंधन की 9 पार्टियों ने वोटर लिस्ट सत्यापन की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। विपक्ष का आरोप है कि यह कवायद चुनाव से पहले मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ का प्रयास है, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नुकसान होगा।
केवल भारतीय नागरिकों को मताधिकार मिले – याचिकाकर्ता की दलील
वहीं, वकील अश्विनी उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में अलग याचिका दाखिल कर यह सुनिश्चित करने की अपील की है कि सिर्फ भारतीय नागरिकों के नाम ही मतदाता सूची में रहें। उनका तर्क है कि फर्जी वोटर लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर कर रहे हैं और मतदाता सूची में विदेशी नागरिकों के नाम शामिल होने की आशंका को लेकर व्यापक जांच जरूरी है।
विपक्षी दलों का तीखा प्रदर्शन
वोटर लिस्ट सत्यापन के खिलाफ बिहार में विपक्षी दल लगातार सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं। कांग्रेस और RJD ने इसे जनविरोधी और अलोकतांत्रिक कदम करार दिया है। पटना, गया, भागलपुर समेत कई जिलों में इंडिया गठबंधन के कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग के कार्यालयों के बाहर धरना-प्रदर्शन किया।
चुनाव आयोग का सख्त रुख
इस बीच चुनाव आयोग ने साफ किया कि वोटर लिस्ट को अद्यतन और त्रुटिरहित बनाने की यह नियमित प्रक्रिया है, ताकि फर्जी वोटर हटाए जा सकें। आयोग ने कहा कि इसमें किसी तरह का पक्षपात नहीं किया जा रहा और सभी दावों व आपत्तियों पर सुनवाई की जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट का रुख अहम
माना जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद इस मुद्दे पर बड़ा फैसला आ सकता है। इससे बिहार समेत कई राज्यों की चुनावी तैयारियों पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।


