High Court Holiday: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का करीब एक माह लंबा ग्रीष्मकालीन अवकाश समाप्त हो गया है। सोमवार 15 जून से हाईकोर्ट की सभी निर्धारित खंडपीठों और एकलपीठों में नियमित सुनवाई फिर शुरू हो गई है। अवकाश खत्म होने के साथ ही अदालत की सामान्य कार्यप्रणाली पहले की तरह बहाल हो गई है। अब अधिवक्ता नियमित रूप से अदालत में उपस्थित होकर अपने पक्ष रख सकेंगे। हाईकोर्ट प्रशासन ने आगामी सप्ताह की कॉज लिस्ट भी जारी कर दी है, जिससे लंबित मामलों की सुनवाई को गति मिलने की उम्मीद है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में ग्रीष्मकालीन अवकाश 18 मई से शुरू हुआ था। इस अवधि में नियमित सुनवाई पर रोक रही, लेकिन जरूरी मामलों की सुनवाई और त्वरित निपटारे के लिए विशेष व्यवस्था जारी रखी गई थी। अत्यावश्यक मामलों को देखते हुए अवकाशकालीन पीठों के माध्यम से सुनवाई की गई, ताकि महत्वपूर्ण मामलों में न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।
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अवकाशकालीन पीठों में हुई जरूरी मामलों की सुनवाई
हाईकोर्ट के ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान न्यायिक कामकाज पूरी तरह बंद नहीं रहा। जरूरी और अत्यावश्यक मामलों की सुनवाई के लिए हर सप्ताह विशेष अवकाशकालीन पीठों का गठन किया गया था। इन पीठों के माध्यम से मामलों की सुनवाई जारी रखी गई। सप्ताह में दो दिन खंडपीठ और एकलपीठ के समक्ष आवश्यक प्रकरणों पर सुनवाई हुई, जिसमें कई महत्वपूर्ण मामलों में आदेश भी पारित किए गए। इस दौरान न्यायिक प्रक्रिया को सुचारु बनाए रखने के लिए हाईकोर्ट प्रशासन ने विशेष व्यवस्था की थी, ताकि जरूरी मामलों में पक्षकारों को राहत मिल सके।
नई कॉज लिस्ट के साथ शुरू हुआ कामकाज
हाईकोर्ट प्रशासन ने आगामी सप्ताह के लिए कॉज लिस्ट जारी कर दी है। इसके बाद सोमवार से सभी निर्धारित खंडपीठों और एकलपीठों में नियमित सुनवाई शुरू हो गई है। अदालत की सामान्य व्यवस्था बहाल होने के साथ अब लंबित मामलों की सुनवाई और निपटारे की प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
अधिवक्ता अब कोर्ट में रखेंगे पक्ष
हाईकोर्ट प्रशासन पहले ही अनिवार्य वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था समाप्त कर चुका है। नियमित कार्यवाही शुरू होने के बाद अधिवक्ता अदालत कक्ष में उपस्थित होकर अपने पक्ष रख सकेंगे। हालांकि, जरूरत के अनुसार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा भी जारी रहेगी। अवकाश समाप्त होने के बाद हाईकोर्ट की कार्यवाही पूर्व व्यवस्था के अनुसार संचालित होगी। नियमित सुनवाई शुरू होने से लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आने की संभावना जताई जा रही है।


