कोरबा – कोयलांचल नगरी की काली कमाई किसको पसंद नहीं है। सुना है अधिकारी काली कमाई के लिए ही कोरबा को चुनकर आते हैं और करोड़ों का खेल करके निकल जाते हैं चाहे कोई भी हो इस खेल से गुरेज नहीं करते। ऐसा ही खेल इन दिनों एसईसीएल कुसमुंडा खदान में खूब चल रहा है जिसमें करोड़ों रुपए की सुरक्षा एजेंसी में तैनात कर्मचारी और अफसर भी शामिल है।
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कोरबा की मेगा प्रोजेक्ट एसईसीएल कुसमुंडा खदान की सुरक्षा व्यवस्था करोड़ों रुपए की त्रिपुरा राइफल्स कंपनी को दी गई है। लेकिन यह भी सुरक्षा दे पानी में नाकाम नजर आ रही है या यू कहे कि सुरक्षा एजेंसी की आड़ में कर्मचारी ही खदान में अपराध को संरक्षण दे रहे हैं। यही कारण है कि खदान में कोयले की चोरी पर विराम नहीं लग पा रहा है, डीजल और कबाड़ तो छोड़ ही दीजिए।
आपको बता दे जिस खदान में एक मोटरसाइकिल बगैर अनुमति के प्रवेश नहीं कर सकता उस खदान में बिना अनुमति के आधा दर्जन से भी अधिक पे – लोडर एंट्री कर रहे हैं। यही नहीं बाकायदा कोयला लोडिंग के लिए उनका उपयोग भी किया जा रहा है। आखिरकार ये पे – लोडर किसके हैं? और किसकी अनुमति से इनको खदानों में एंट्री दी जा रही है? क्या इसके लिए किसी तरह का टेंडर निकाला गया था?
इस तरह पे – लोडरों की एंट्री से कुसमुंडा खदान में तैनात करोड़ों की त्रिपुरा राइफल्स की सुरक्षा एजेंसी पर सवाल खड़े होने लगी है। हाल ही में खदान की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बगैर अनुमति अनाधिकृत वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने नई तकनीक का इस्तेमाल किया गया है जिसमें लाखों का खर्च भी हुआ है, गेट में सुरक्षा एजेंसी भी तैनात है। लेकिन कड़ी सुरक्षा के बावजूद अनाधिकृत पे – लोडर की खुलेआम खदानों में एंट्री कैसे हो रही है? क्या इसके पीछे माया का खेल चल रहा है।
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सूत्रों की माने तो एसईसीएल कुसमुंडा खदान में एक चर्चित अधिकारी है जो लंबे समय से कोयले के खेल में सबसे ज्यादा माहिर है। अधिकारी के पांव कुसमुंडा खदान में ऐसे जमे हुए हैं मानो अंगद के पांव हो । सूत्रों की माने तो खदान में गाड़ी की एंट्री से लेकर कोयला लोड एग्जिट वाहनों से वसूली का खेल हर दिन चलता है। सूत्रों की माने तो अपने मैनेजमेंट क्षमता के कारण ही ये अधिकारी अब तक यहां टिके हुए हैं। लेकिन अब इस अधिकारी की करतूत बाहर आने वाली है जिसमें कई मामले भी सामने आ सकते हैं।
ठेकेदार चला रहे खदान? सुरक्षा एजेंसी और SECL प्रबंधन बना मूकदर्शक
वैसे देखने में यह भी आ रहा है कि कुसमुंडा जीएम सचिन पाटिल की पोस्टिंग के बाद से खदानों में सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह से ठप्प है। लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं वहीं ठेके में भी बड़ा खेल किया जा रहा है, बगैर अनुमति खदानों में महिला बाउंसरों की नियुक्ति कर दी जा रही है जो खुले आम भू स्थापितों के साथ मारपीट जैसी घटना को अंजाम दे रहे हैं, लेकिन वहीं पर प्रबंधन पूरी तरह से लाचार नजर आ रही है। आखिर क्या कारण है कि ठेकेदारों का मनोबल इस तरह बढ़ा हुआ है?
इसी तरह कर्मचारियों को ले जाने वाले बस का भी बुरा हाल है जिसमें ठेकेदार की मनमानी खूब देखने को मिली है। एसईसीएल प्रबंधन की यह घोर लापरवाही है जो ठेकेदारों पर ही अपना नियंत्रण नहीं कर पा रहे हैं। क्या ठेकेदारों के साथ अधिकारियों की साठ – गांठ है?


