RTE Admission 2026: शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के तहत नि:शुल्क शिक्षा की सुविधा से नर्सरी कक्षा को बाहर किए जाने के बाद अभिभावकों की परेशानी बढ़ गई है। शहर के अधिकांश निजी स्कूलों में तीन साल के बच्चों की नर्सरी कक्षा में प्रवेश के लिए 40 से 50 हजार रुपए तक सालाना फीस ली जा रही है, जिससे मध्यम और गरीब वर्ग के अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
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अभिभावकों का कहना है कि पहले कई स्कूलों में शुरुआती कक्षाओं में कम फीस में पढ़ाई की सुविधा मिल जाती थी, लेकिन अब नर्सरी कक्षा को आरटीई योजना से बाहर कर दिए जाने के कारण उन्हें निजी स्कूलों की तय फीस भरनी पड़ रही है। कई बड़े स्कूलों में एडमिशन के समय अलग से रजिस्ट्रेशन और अन्य शुल्क भी लिया जा रहा है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक आरटीई के तहत वर्तमान में कक्षा पहली से 12वीं तक के लिए ही नि:शुल्क शिक्षा का प्रावधान है। नर्सरी या प्री-प्राइमरी कक्षाएं इस योजना में शामिल नहीं हैं। ऐसे में इन कक्षाओं में प्रवेश पूरी तरह स्कूल प्रबंधन के नियमों और फीस संरचना पर निर्भर करता है।
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आरटीई के तहत कमजोर और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के बच्चों को निजी स्कूलों में प्रवेश दिलाने की प्रक्रिया जारी है। विभाग के अनुसार इच्छुक अभिभावक 31 मार्च तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके बाद लॉटरी के माध्यम से पात्र बच्चों को निजी स्कूलों में प्रवेश दिया जाएगा। अभिभावकों का कहना है कि यदि नर्सरी कक्षा को भी आरटीई योजना में शामिल किया जाए तो छोटे बच्चों की पढ़ाई की शुरुआत में ही आर्थिक बोझ कम हो सकता है।


