नई दिल्ली। महाराष्ट्र के पुणे में सरकारी जमीन की कथित अवैध बिक्री को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। यह मामला मुंधवा इलाके की करीब 40 एकड़ जमीन से जुड़ा है, जिसकी बाजार कीमत लगभग 1800 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
आरोप है कि यह जमीन पार्थ पवार की कंपनी Amadea Enterprises को सिर्फ 300 करोड़ रुपये में बेच दी गई, और इसके साथ ही 21 करोड़ रुपये की स्टांप ड्यूटी भी माफ कर दी गई। इस सौदे ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है और विपक्ष ने इसे एक “जमीन घोटाला” करार दिया है।
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अजित पवार और पार्थ पवार पर विपक्ष का निशाना
इस सौदे को लेकर विपक्षी दलों ने उपमुख्यमंत्री अजित पवार और उनके बेटे पार्थ पवार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। विपक्ष का कहना है कि यह सौदा सरकारी संपत्ति को सस्ते में निजी कंपनी को देने की साजिश है।
वहीं, अजित पवार की ओर से इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जमीन की बिक्री कानूनी प्रक्रिया के तहत हुई है और सभी दस्तावेज पारदर्शी हैं।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने दिए जांच के आदेश
राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितना भी बड़ा व्यक्ति क्यों न हो।”
उन्होंने बताया कि एफआईआर दर्ज हो चुकी है, हालांकि उसमें पार्थ पवार का नाम शामिल नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि जांच में किसी की भी भूमिका सामने आती है, तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।


