सक्ती – फर्जी रकबा, बोगस खरीदी, धान की री – साइकलिंग सब कुछ जिले में इन दोनों संभव नजर आ रहा है। इस पूरे खेल को रचने के लिए माया का जाल बिछा दिया जाता है जिसमें जिम्मेदार भी फंसकर अपने पद और कलम का दुरुपयोग करने से गुरेज नहीं करते हैं जिससे सरकार को बड़ी आर्थिक क्षति हो रही है। लेकिन इसका खामियाजा आम जनता को भुगतनी पड़ रही है। पूरा खेल जनता द्वारा सरकार को दिए गए टैक्स के पैसे पर बट्टा लगाने जैसा है क्योंकि सरकार की योजना आम जनता के टैक्स के पैसे से ही चलती है।
हम बात कर रहे हैं सक्ती जिले के धान खरीदी केंद्र भोथीया की, इस धान खरीदी केंद्र में ऐसे भूमि का भी पंजीयन कर दिया गया है जो एक मंदिर के नाम पर आवंटित है। एक किसान के द्वारा खुद को सर्वांकार बताते हुए अपने निजी भूमि के साथ मंदिर की लगभग 15 एकड़ भूमि को भी शामिल करते हुए प्रतिवर्ष लाखों रुपए का धान बेच रहा है। अगर इसकी कीमत का मूल्यांकन करें तो लगभग 10 लाख रुपए है। इतनी बड़ी राशि का फायदा सिर्फ एक परिवार को ही मिल रहा है जबकि भूमि दान की बताई जा रही है।
हैरानी वाली बात यह है कि उक्त खसरा भूमि राजस्व रिकॉर्ड में पिता का नाम प्रबंधक जिला अधिकारी दर्ज है। इस मामले की शिकायत ग्राम भोथीया निवासी धनबंतरी चंद्रा द्वारा कई बार की गई लेकिन अब तक कुछ भी हासिल ना हो सका। उसने एक बार फिर सक्ती कलेक्टर को लिखित शिकायत करते हुए उक्त सभी खसरा नंबर के पंजीयन के आधार पर 21 एवं 22 जनवरी 2025 को जारी टोकन जिसमें धान की मात्रा लगभग 407.6 क्विंटल है पर रोक लगाने निवेदन किया है।
शिकायतकर्ता ने उक्त भूमि के संबंध में कलेक्टर जिला – सक्ती को अवगत कराते हुए लिखा है कि श्री महादेव मंदिर के नाम पर ग्राम मलनी महाल पटवारी हल्का नंबर 05 की भूमि को श्याम सुंदर पिता मनमोहन के द्वारा अपने आप को बिना किसी सक्षम न्यायालय के आदेश के बिना सर्वाकार के नाम से राजस्व अभिलेखों में दर्ज कर लिया है और अपने ग्राम भोथीया में स्थित निजी भूमियों के साथ श्री महादेव जी प्रबंधक जिला अध्यक्ष कलेक्टर के नाम पर अवस्थित उक्त भूमियों को भी सेवा सहकारी समिति मर्यादित भोथीया, तहसील – जैजैपुर में धान बिक्री का पंजीयन कर दिया है और धान का विक्रय कर रहा है।
इस वर्ष भी उक्त भूमि का पंजीयन कर धान विक्रय करने 21 एवं 22 जनवरी 2025 को टोकन जारी किया गया है जिसको तत्काल रोका जाए। शिकायतकर्ता का आरोप है कि श्याम सुंदर पुत्र मनमोहन द्वारा सर्वांकर के रूप में अपने नाम पर नामांकन दर्ज कराकर विधि विरुद्ध ढंग से यह कार्य किया जा रहा है जो विधि विरुद्ध है जिसका माननीय कलेक्टर न्यायालय में मामला विचाराधीन भी है। ऐसे में अपील प्रकरण के अंतिम निराकरण तक रोक लगाने निवेदन किया है ताकि शासन को होने वाले अपूर्णीय क्षति से बचाया जा सके।
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चार सवाल का मिलेगा जवाब?
इस पूरे प्रकरण में कई सारे सवाल सामने आ रहे हैं। सबसे पहला सवाल यह है कि उक्त भूमि यदि मंदिर के नाम पर है जिसमें प्रबंधक जिला अधिकारी दर्ज है तो किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर पंजीयन कैसे संभव है? क्या संबंधित सेवा सहकारी समिति मर्यादित, भोथिया के संस्था प्रबंधक, प्राधिकृत अधिकारी एवं जिम्मेदार अधिकारी पंजीकृत व्यक्ति श्याम सुंदर के साथ मिले हुए हैं? क्या इनके संरक्षण में यह सब कुछ किया जा रहा है?
दूसरा सवाल यदि मंदिर के नाम पर आवंटित भूमि है तो क्या शासन के निर्देश में ऐसे भूमि का किसी व्यक्ति विशेष के नाम पर पंजीयन किया जा सकता है? यदि हां तो नियम क्या है इसकी जानकारी सार्वजनिक रूप से दी जाने की आवश्यकता है और यदि नहीं तो फिर पंजीयन करने से लेकर धान बिक्री करने वाले के खिलाफ कार्यवाही क्यों नहीं हो रही है? क्यों इस जमीन का पंजीयन एक व्यक्ति के नाम पर किया जा रहा है? इसके अलावा उक्त धान की राशि भी इस व्यक्ति के खाते में समायोजित की जा रही है। ऐसे में खाता की जांच, राशि का व्यय और आडिट कब हुआ है कि जांच होनी चाहिए। क्या इसकी जानकारी कलेक्टर कार्यालय में भेजी गई है? इसकी भी जांच होनी चाहिए।
तीसरा सवाल धनवंतरी चंद्रा द्वारा शासन हित में स्वयं आर्थिक, मानसिक और शारीरिक पीड़ा सहते हुए भी शिकायत कर कार्यवाही करने की मांग कर रहा है तो उसकी शिकायत पर जांच क्यों नहीं की जा रही है? और यदि शिकायत झूठी है तो भी कार्यवाही शिकायतकर्ता पर क्यों नहीं हो रही है? आखिर इसका जवाब कौन देगा?
चौथा सवाल यदि समय रहते 21 एवं 22 जनवरी 2025 को जारी किए गए धान की टोकन लगभग क्रमशः 222.40 क्विंटल और 185.20 क्विटल कुल 407.60 क्विंटल धान जिसकी कीमत 407.60*3100 = 12,63,560/- है बिक्री कर दी जाती है और जांच में शिकायत सही मिल गई तो इसके लिए कौन जिम्मेदार होगा और इतने बड़े रकम की भरपाई कौन करेगा?
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संस्था प्रबंधक ने पक्ष रखने से किया इनकार
इस पूरे मामले में जब मीडिया टीम द्वारा संस्था प्रबंधक भोथिया अशोक चंद्रा से उनका पक्ष रखने को कहा गया तो उन्होंने पक्ष रखने से इनकार कर दिया और प्राधिकृत अधिकारी द्वारा पक्ष लेने की बात कही गई। आखिरकार संस्था प्रबंधक ने इस मामले में कैमरे के सामने अपना पक्ष क्यों नहीं रखा? क्या सच में गड़बड़ी हुई है? क्योंकि पहले भी इस समिति में फर्जी रकबा पंजीयन को लेकर संस्था प्रबंधक अशोक चंद्रा के ऊपर अपने रिश्तेदारों को लाभ दिलाने का गंभीर आरोप लगा था जिस मामले को भी दबा दिया गया है जबकि कई किसानों ने फर्जी लाभ उठाया था। हालांकि पिछली शिकायत का मामला फिर से उठेगा और इस बार जांच भी होगी।
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प्राधिकृत अधिकारी ने दी जानकारी
सेवा सहकारी समिति भोथिया के प्राधिकृत अधिकारी गंगाधर चंद्रा ने बताया कि श्याम सुंदर द्वारा उक्त भूमि का पंजीयन कराया है। भूमि भट्ट सिद्धेश्वर शिव मंदिर का है जिसमें सर्वाकार श्याम सुंदर है जिसके आधार पर उनके नाम पर पंजीयन किया गया है जिसमें धान खरीदी की जाती है और खाद बीज दिया जाता है। इस भूमि के संबंध में कलेक्टर न्यायालय में मामला चल रहा है इस बात की जानकारी नहीं है और ना ही उनके द्वारा जानकारी दी गई है।
अब सवाल यह है कि जब जमीन की शिकायत पहले से हो चुकी है l, कलेक्टर न्यायालय में मामला विचाराधीन है फिर भी शिकायतकर्ता ने एक बार कलेक्टर सक्ती को आज लिखित शिकायत करते हुए 21 जनवरी और 22 जनवरी को जारी टोकन को निरस्त करने की मांग किया है जिस पर सब की निगाहें टिकी हुई है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करती है? क्या टोकन निरस्त होंगे? या धान की बिक्री होगी? क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी? यह सब तो प्रशासनिक कार्यविधि पर निर्भर करता है।


