पूर्णिया, बिहार। जिले में अंधविश्वास की सनक ने एक ही परिवार के पांच लोगों की जान ले ली। मामला इतना दर्दनाक है कि जिसने भी सुना, सिहर उठा। रविवार रात से लापता परिवार की लाशें सोमवार शाम एक तालाब में बरामद हुईं।
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मृतकों की पहचान बाबूलाल उरांव, उनकी पत्नी सीता देवी, मां, बहू और बेटे के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, पूरा परिवार झाड़फूंक का काम करता था। तीन दिन पहले गांव में एक बच्चे की मौत हो गई थी। इसके बाद गांववालों ने अंधविश्वास के चलते इस हत्याकांड को अंजाम दिया।
पीड़ित परिवार के इकलौते बचे सदस्य सोनू ने बताया, “रविवार रात करीब 10 बजे अचानक करीब 50 लोग घर में घुस आए। मेरी मां सीता देवी पर डायन होने का आरोप लगाया और बांस-लाठी से पिटाई करने लगे। देखते ही देखते पूरे परिवार को बेरहमी से पीट-पीटकर मार डाला।”
पुलिस की जांच में सामने आया कि हमलावरों ने शवों पर डीजल डालकर आग लगा दी। इसके बाद शवों को जला-बोरों में भरकर डेढ़ किलोमीटर दूर तालाब में जलकुंभियों के बीच छिपा दिया। जब पुलिस ने खोजबीन की तो पांचों शव करीब 80 फीसदी जल चुके मिले।
पुलिस ने इस मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए एक आरोपी नकुल ने कबूल किया, “मारपीट के बाद डीजल छिड़ककर पांचों को जिंदा जला दिया था।”
घटना के बाद इलाके में दहशत और तनाव का माहौल है। प्रशासन ने गांव में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया है। एसपी पूर्णिया ने कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।


