रायपुर: मई महीने की पहली तारीख ही छत्तीसगढ़ के होटल और रेस्तरां संचालकों के लिए ‘महंगाई का झटका’ लेकर आई है। कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम में ₹993 की भारी बढ़ोतरी के साथ, अब बाहर खाना-पीना महंगा होने वाला है। लागत बढ़ने से जहाँ मीनू कार्ड बदलने की तैयारी है, वहीं घरेलू सिलेंडर के व्यावसायिक उपयोग की आशंका ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। मई की तपती गर्मी के बीच अब रसोई की आग भी महंगी हो गई है। तेल कंपनियों ने 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर के दाम में 993 रुपए की ऐतिहासिक वृद्धि की है। छत्तीसगढ़ में अब एक कमर्शियल सिलेंडर ₹3000 के आंकड़े को पार कर गया है। इस बढ़ोतरी का सीधा असर होटल, कैफे और ढाबों पर पड़ेगा, जहाँ अब लागत निकालना मुश्किल होता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल ‘थाली’ महंगी होगी, बल्कि कई छोटे होटल संचालकों को अपने ‘मीनू’ में कटौती करनी पड़ सकती है।
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महंगाई की यह मार सिर्फ बड़े होटल, रेस्टारेंट या कैफे तक सीमित नहीं है। शहर के चौक-चौराहों पर छोटे टी-स्टॉल और नाश्ता सेंटर चलाने वाले दुकानदार सबसे ज्यादा परेशान हैं, क्योंकि उनके लिए लगभग 1000 रुपए की बढ़ोतरी का मतलब है पूरे दिन की कमाई का खत्म हो जाना है । घरेलू लाल सिलेंडर और कमर्शियल नीले सिलेंडर की किमतों में भारी अंतर के कारण अब कालाबाजारी और घरेलू सिलेंडरों के दुरुपयोग की आशंका गहरा गई है। कमर्शियल सिलेंडर महंगा होने से लोग चोरी-छिपे 14.2 किलो वाले घरेलू सिलेंडरों का उपयोग होटलों में कर सकते हैं। हालांकि प्रशासन ने सख्त निगरानी के निर्देश दिए हैं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर इसे रोकना एक बड़ी चुनौती होगी।
कुल मिलाकर स्थिति यह है कि जनता के लिए यह राहत ‘आधी-अधूरी’ है। घर का चूल्हा तो उसी दाम पर जलेगा, लेकिन बाहर की ‘थाली’ अब आम आदमी की पहुँच से दूर होती दिख रही है। होटल संचालकों ने साफ कर दिया है कि अगर कीमतें कम नहीं हुईं, तो मीनू कार्ड का बदलना तय है। अब देखना होगा कि तेल कंपनियों का यह फैसला छत्तीसगढ़ के स्वाद पर कितना भारी पड़ता है।


