बिलासपुर : हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि परिवार का कोई अन्य सदस्य सरकारी नौकरी में हो तो भी दूसरे सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति दी जाएगी। कोर्ट ने कहा, सिर्फ तकनीकी आधार नहीं, परिवार की आर्थिक स्थिति भी देखना जरूरी है। हाईकोर्ट के इस आदेश से मृत सफाई कर्मी के परिवार को राहत मिली है।
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कोर्ट ने साफ किया कि अनुकंपा नियुक्ति के मामले में संबंधित प्राधिकरण को पहले परिवार की वास्तविक आर्थिक स्थिति और वित्तीय संकट का आकलन करना होगा, क्योंकि अनुकंपा नियुक्ति योजना का उद्देश्य मृत कर्मचारी के परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता प्रदान करना है। इसलिए केवल तकनीकी आधारों पर दावा खारिज करना योजना की मानवीय भावना के विपरीत होगा।
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दरअसल, याचिकाकर्ता के पिता अंबिकापुर नगर निगम में सफाई कर्मचारी के पद पर कार्यरत थे। सर्विस के दौरान उनके निधन के बाद परिवार में पत्नी, तीन पुत्र और एक पुत्री रह गए, जो उनकी आय पर निर्भर थे। याचिकाकर्ता ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया, लेकिन यह कहते हुए आवेदन खारिज कर दिया गया कि उसकी मां पहले से सफाई कर्मचारी के रूप में कार्यरत हैं। इसके खिलाफ याचिका पर एकल पीठ ने नियुक्ति से इनकार करने का आदेश रद्द करते हुए नगर निगम को अनुकंपा नियुक्ति देने का निर्देश दिया।
इस आदेश को चुनौती देते हुए नगर निगम आयुक्त ने खंडपीठ के समक्ष अपील दायर की थी। डिवीजन बेंच में सुनवाई के दौरान निगम ने तर्क दिया कि 14 जून 2013 की राज्य नीति के अनुसार यदि परिवार का कोई सदस्य पहले से सरकारी सेवा में है तो अनुकंपा नियुक्ति नहीं दी जा सकती। वहीं याचिकाकर्ता ने कहा कि उसकी मां का वेतन बेहद कम है और परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है। साथ ही अधिकारियों ने परिवार की वास्तविक आर्थिक स्थिति का आकलन किए बिना आवेदन खारिज कर दिया।
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खंडपीठ ने कहा कि परिवार ने अपना मुख्य कमाने वाला सदस्य खो दिया था और केवल मां के नौकरी में होने को अनुकंपा नियुक्ति से इनकार करने का पूर्ण आधार नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि कम वेतन वाली नौकरी करने वाला कोई सदस्य होने मात्र से यह नहीं माना जा सकता कि परिवार आर्थिक संकट से उबर चुका है। अदालत ने कहा, कि अनुकंपा नियुक्ति कोई अधिकार नहीं है, लेकिन यह एक कल्याणकारी और मानवीय योजना है, जिसका उद्देश्य आर्थिक संकट में फंसे परिवारों को राहत पहुंचाना है, इसलिए अधिकारियों को दावों पर विचार करते समय व्यावहारिक और उद्देश्यपूर्ण दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। इन टिप्पणियों के साथ कोर्ट ने नगर निगम की अपील खारिज करते हुए एकल पीठ के आदेश को बरकरार रखा है।


