कोरबा – एस.ई.सी.एल. कुसमुंडा प्रबंधन एक बार फिर से सुर्खियों में है। मामला कुसमुंडा जीएम और उनके मातहत टीम कर्मचारियों की कार्यशैली से जुड़ा हुआ है। कुसमुंडा जीएम पाटिल 77 वें गणतंत्र दिवस पर ऐसे गाड़ी पर सवार हो कर परेड और सलामी लेने लगे जो 31 साल पुरानी कबाड़ जिप्सी थी जिसका इंश्योरेंस, फिटनेस और रजिस्ट्रेशन सब कुछ फेल था फिर भी सवार होकर इंदिरा स्टेडियम आदर्श नगर कुसमुंडा में परेड की सलामी लेते नजर आए। लेकिन इस पुरानी कंडम गाड़ी में एक वरिष्ठ अधिकारी के सवार होने की मजबूरी और हकीकत की चर्चा गलियारों में खूब होने लगी है जो कि जल्द ही SECL मुख्यालय तक जा सकती है। वहीं कुछ लोग इसे माया का खेल भी कह रहे हैं।
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आपको बता दें SECL कुसमुंडा कोरबा जिले की मेगा प्रोजेक्ट खदान में से हैं जिसका उत्पादन लक्ष्य प्रतिवर्ष लगभग 55 मिलियन टन है । लेकिन यहां प्रबंधन की लापरवाही ने उत्पादन के लक्ष्य को प्रभावित कर दिया है। अपने चहेते लोगों को उपकृत करने के लिए कई गलतियों पर पर्दा डालकर कार्य करा रहे हैं जिसके कई उदाहरण भी नजर आए हैं। खदान के अंदर भू विस्थापितों पर महिला बाउंसर की दादागिरी, मारपीट, लाठियां भांजना, चोरी के लिए करोड़ों की सुरक्षा में सेंध लगाना, बगैर अनुमति दर्जनों अवैध पे लोडरों को खदान में प्रवेश देकर चोरी करने खुला संरक्षण देना, स्टीम कोल का खेल कराना, एक अधिकारी के इशारे पर मैनेजमेट की सेटिंग सब आम बात हो गई है। लोगों का कहना है कि खदान अब चोरों के हवाले हो गई है।
लेकिन राष्ट्रीय पर्व जैसे आयोजन में SECL कुसमुंडा प्रबंधन की व्यवस्था में हुई इस लापरवाही ने लोगों को हैरान कर दिया है। SECL कुसमुंडा में अहम और जिम्मेदार पद पर आसीन जी.एम. सचिन तानाजी पाटिल की व्यवस्था में इतनी बड़ी चूक कैसे और किसने की? या फिर ऐसी क्या मजबूरी बन गई कि जीएम पाटिल को कबाड़ हो चुके गाड़ी जिसका इंश्योरेंस, फिटनेस और रजिस्ट्रेशन फेल है जिसे उपयोग करने की भी अनुमति नहीं है जो यातायात नियमों के विपरीत है फिर भी उसमें बैठकर सलामी लेनी पड़ गई?

क्या जिम्मेदार ने अपने चहेते को उपकृत करने के लिए स्वेच्छाचारिता करते हुए जानबूझकर अपने पद और अधिकार का दुरुपयोग किया है और अधिकारी के विश्वास पर छुरा घोपने का काम किया है? या फिर कोई बड़ा षडयंत्र है जिसके सभी मिले हुए है और कहनी कुछ और ही है? बड़ा सवाल है। इस सवाल से कुसमुंडा प्रबंधन अब घिरता हुआ नजर आ रहा है जिसका असर मुख्यालय तक पहुंच गई तो कार्यवाही की गाज भी गिर सकती है वहीं शिकायत होने पर यातायात के शर्तों का उल्लंघन पर पुलिसिया कार्रवाई भी होनी तय चाहिए मानी जा रही है।
सूत्रों की माने तो यह सब कुसमुंडा प्रबंधन और उनके चहेते ठेकेदार की करस्तानियां है जो लंबे समय से चली आ रही है। माया के खेल ने सबको अंधा कर दिया है। SECL प्रबंधन के इस कार्यशैली पर अब प्रश्न उठने लगा है, जहां एक तरफ SECL में अधिकारियों के लिए लगाए जाने वाले प्राइवेट लग्जरी गाड़ियों के टेंडर नियम में 03 साल से अधिक पुरानी गाड़ियों को टेंडर की प्रक्रिया से बाहर कर देता है तो फिर 31 साल पुरानी गाड़ी बगैर दस्तावेज कैसे उपयोग कर लिया गया?
ठीक इसी तरह कुड़मुंडा खदान में ही 14 साल पुरानी कंडम बस को खदान के अंदर कर्मचारियों के जान को जोखिम में डालकर गेट से खदान अंदर लाने एवं ले जाने के लिए चलाया जा रहा है यह विडंबना कैसी? क्या कंडम बस की परमिट और फिटनेस की जांच की गई? जब 3 साल पुरानी गाड़ी खदान में नहीं चल सकती तो 14 साल पुरानी बस कैसे चल रही है? इस बस का ठेका किसको मिला है जो मौत का सौदागर बन बैठा है? बस के लिए जारी टेंडर में विज्ञापन की शर्तें क्या थी? क्या पुरानी बस के लिए ही टेंडर जारी किया गया था? यदि नहीं तो शिकायत के बाद भी कंडम बस पर रोक क्यों नहीं लगी? आखिरकार किसको फायदा पहुंचाने के लिए यह सिस्टम चलाया जा रहा है? आखिरकार कौन है इसका जिम्मेदार? बड़ा सवाल है।
क्या इन सवालों का जवाब दे पाएंगे अधिकारी
1.गणतंत्र दिवस 2026 के लिए गाड़ी का टेंडर कब निकाला गया था?
2. गाड़ी का टेंडर किस ठेकेदार को मिला था?
3. गाड़ी के समस्त दस्तावेज और भौतिक जांच करने की जिम्मेदारी किसी अधिकारी को थी?
4. ठेकेदार द्वारा गाड़ी के संबंध प्रस्तुत समस्त दस्तावेजों का अवलोकन तथा परीक्षण निरीक्षण जब जिम्मेदार अधिकारी के द्वारा किया गया था तब परीक्षण में क्या पाया था कि जानकारी कब और किस अधिकारी को दी गई थी?
5. अगर कोई अनहोनी घटना या हादसा हो जाता तो इसके लिए जिम्मेदार कौन होता? और इसकी भरपाई प्रबंधन कैसे करती?
6. क्या इस मामले में दोषियों के खिलाफ जांच करते हुए कड़ी कार्रवाई की जाएगी?
7. क्या ठेकेदार जिम्मेदार था और यदि हां तो क्या ठेकेदार को ब्लैक लिस्ट करते हुए उसके सभी कामों की जांच करते हुए उसके ऊपर कारवाई की जाएगी?
8. क्या इस कबाड़ गाड़ी के एवज में राशि का भुगतान किया जाएगा?
सूत्रों की माने तो कुसमुंडा प्रबंधन में मुखिया की नाकामी और स्वेच्छा चारिता ने इस तरह की लापरवाही की पुनरावृत्ति करा रही है। सब कुछ साफ नजर आ रहा है फिर भी शायद जीएम पाटिल अंधा, गूंगा और बहरा बन गए हैं। इस पूरे दृश्य को देखकर एक कहावत याद आ गई जो सटीक भी है “जैसा राजा – वैसा प्रजा” यदि राजा को गलतियां नजर नहीं आती है तो प्रजा लगातार गलतियां करना चाहता है।
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सूत्रों की माने तो SECL कुसमुंडा खदान पूर्व में KGF कांड का मास्टरमाइंड रहा है जहां कोयले की चोरी खुलेआम होती रही। आज भी वर्तमान में खदान के अंदर यदि कोयले की स्टॉक की जांच तीसरी एजेंसी से कराई जाती है तो निश्चित ही करोड़ों के घपले नजर आएंगे। भरी बरसात में लोगों का आशियाना उजाड़ कर बेघर कर आज भी सड़क को बनाने में नाकाम है। प्रदूषण इतना है कि लोग गंभीर बीमारियों के चपेट में आ रहे हैं। पर्यावरण की टीम चोरों की तरह आती है और जांच करके चली जाती है रिपोर्ट क्या आया किसी को पता नहीं।


