हाल के दिनों में विपक्षी दलों द्वारा ‘वोट चोरी’ और मतदाता सूचियों में धांधली के गंभीर आरोपों पर चुनाव आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ तौर पर कहा कि इस तरह के आरोप संविधान और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अपमान हैं।
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मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने कहा, “हमारे लिए कोई पक्ष या विपक्ष नहीं है। सभी राजनीतिक दल हमारे लिए समान हैं। चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाने वाले ‘वोट चोरी’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करके संविधान का अपमान कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि आयोग ने हमेशा निष्पक्षता और पारदर्शिता से काम किया है।
अस्पष्ट आरोपों को न माना जाए सच:
चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के उन आरोपों का भी जवाब दिया, जिसमें उन्होंने महाराष्ट्र, कर्नाटक और हरियाणा में मतदाता सूचियों में ‘हेरफेर’ का दावा किया था। आयोग ने स्पष्ट किया कि उन्होंने राहुल गांधी से उन आरोपों के समर्थन में सबूत और हलफनामा मांगा है, लेकिन अभी तक कोई ठोस दस्तावेज नहीं मिला है। आयोग ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति या पार्टी बिना सबूत के आरोप लगाती है, तो उसे सच नहीं माना जा सकता।
चुनाव आयोग ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे मतदाता सूचियों में किसी भी तरह की गड़बड़ी को सही समय पर, यानी दावों और आपत्तियों के चरण में बताएं। आयोग ने कहा कि सभी दलों को मतदाता सूचियों का ड्राफ्ट दिया जाता है ताकि वे इसकी जांच कर सकें।
यह प्रेस कॉन्फ्रेंस ऐसे समय में हुई है, जब बिहार में कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ‘वोट अधिकार यात्रा’ शुरू करने वाले हैं, जिसमें वे मतदाता सूची से कथित तौर पर लाखों नाम हटाए जाने का मुद्दा उठाएंगे।


