कोरबा – जिला परिवहन कार्यालय में इन दिनों ऐसे वाक्याये हो रही हैं जिससे सुशासन सरकार की छवि धूमिल होती नजर आ रही है। अधिकारी अपने जवाबदेही पद को भूलकर स्वेच्छा चारिता पर उतर आए हैं जिसके फोटो वीडियो भी खूब वायरल हो रहे हैं।
ताजा मामला प्रदूषण जांच केंद्र का है। विनायक प्रदूषण जांच केंद्र के संचालक महेंद्र सिंह पिछले कई वर्षों से दर – दर की ठोकर खा रहा है लेकिन सुनने वाला शायद कोई नहीं है। पिछली सरकार में यातनाएं सहने के बाद प्रदेश में सरकार बदलते ही महेंद्र की उम्मीद जागी थी लेकिन इस सरकार में भी अधिकारी एवं कर्मचारी की मनमानी ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। अब वह न्याय के लिए कोर्ट की शरण में जाने को मजबूर हो गया है।
आपको बता दें कोरबा निवासी महेंद्र सिंह द्वारा खुद के नाम पर संचालित चलित प्रदूषण जांच केंद्र को स्थाई प्रदूषण जांच केंद्र बजरंग चौक दीपका में स्थानांतरित करने हेतु आवेदन किया था। लेकिन कई वर्ष बीत जाने के बाद भी उनको अनुमति नहीं मिल पाई। अनुमति के संबंध में संचालक का कहना है कि फीस और आवेदन देने के बाद भी बाबू और अधिकारी की मनमानी के कारण आज भी कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है।
पिछले कई वर्षों से लगातार तकलीफ सहने के बाद उनका गुस्सा मंगलवार को कार्यालय परिसर में फूटा। महेंद्र सिंह के द्वारा जिला परिवहन कार्यालय के बाबू और अधिकारियों के ऊपर गंभीर आरोप लगाते हुए शोर मचाने लगे। महेंद्र का कहना है कि मुझे जानबूझकर परेशान करने के लिए काम नहीं किया जा रहा है जिसका मुख्य कारण चढ़ोत्तरी देकर खुश नहीं कर पाना है जिसका दंश वह आज भी झेल रहा है।
इस घटना के बाद कार्यालय में मौजूद अधिकारियों एवं कर्मचारियों में हड़कंप मच गया और चर्चा भी होने लगी। इसी बीच परिवहन इंस्पेक्टर अतुल तिवारी ने शाम को निरीक्षण करने का आश्वासन देने लगे। सुनिए वीडियो
महेंद्र सिंह का कहना है कि उनके द्वारा पीयूसी सेंटर चलाने के लिए विधिवत आवेदन देते हुए शासन को दी जाने वाली फीस का भुगतान कर दिया है। आवेदन देने के बाद संबंधित शाखा प्रभारी द्वारा नोट – शीट को आगे बढ़ाना था लेकिन नहीं बढ़ाया गया। जब मेरे द्वारा इसकी शिकायत की गई तो लगभग दो साल बाद नोट – शीट बढ़ाई गई। लेकिन स्थल निरीक्षण रिपोर्ट नहीं होने के कारण आज भी उनका काम रुका हुआ है।
महेंद्र सिंह का कहना है कि अधिकारी एवं कर्मचारियों की लापरवाही के कारण न सिर्फ उन्हें आर्थिक क्षति हुई है बल्कि सरकार को हर साल मिलने वाले राजस्व की भी हानि पहुंचाई गई है।
अब सवाल यह है कि आखिरकार क्या वजह थी कि महेंद्र सिंह के द्वारा आवेदन करने के बाद भी उनके फाइल को आगे नहीं बढ़ाया गया? आज तक उनके आवेदन पर कार्रवाई नहीं होने के लिए जिम्मेदार कौन है? इस तरह अपने कर्तव्यों के प्रति लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध शिकायत होने के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है? कोरबा की जनता जानना चाहती है।
प्रदेश में सुशासन सरकार है फिर भी जिला परिवहन कार्यालय में सुशासन सरकार को टॉर्च की रौशनी लेकर ढूंढने से भी नजर नहीं आ रहा है। जिला परिवहन अधिकारी विवेक सिन्हा अपने कर्तव्यों के प्रति इतने बेपरवाह हो चुके हैं कि आमलोगों को परेशान होना पड़ रहा है। यही हाल परिवहन इंस्पेक्टर अतुल तिवारी का है जो चंदन जैसे गैर कर्मचारी से अपना सरकारी काम करवा रहे हैं। बाबू विकास ठाकुर भी इस मामले में पीछे नहीं है जो अपने ही केबिन में अनाधिकृत लोगों को बिठाकर काम कराते हैं।
अब देखना होगा कि इस मामले में महेंद्र को न्याय मिल पाता है या फिर कोई नया खेल परिवहन विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारियों के द्वारा रचकर चक्रव्यूह बना दिया जाएगा और उसे परेशान होना पड़ेगा या फिर न्यायालय ही उसे न्याय दिलाएगी।


