कोरबा – प्रभारी जिला परिवहन अधिकारी विवेक सिन्हा की मनमानी एक बार फिर सामने आई है। कार्यालय अंदर स्वेच्छाचारित करने वाले अपने अधीनस्थ अधिकारियों एवं कर्मचारियों को नियंत्रित कर पाने में विफल प्रभारी डीटीओ ने सरकारी सिस्टम को ही हाशिए में ले लिया है। अधिकारी ने सरकारी कार्यालय को ही पार्टिशन लगाकर आम लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है जिससे उन्हें मूलभूत सुविधा जैसे पेयजल और सुलभ सुविधा से वंचित होना पड़ रहा है। इस अव्यवस्था को लेकर सबसे ज्यादा महिलाओं को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
पब्लिक कार्यालय में इस तरह की मनमानी का जिले में यह पहला मामला सामने आया है जो कि अब चर्चा का विषय बना हुआ है। परिवहन अधिकारी की इस मनमानी उनकी कार्यशैली पर सवाल खड़े शुरू कर दिए हैं और पूर्व में पदस्थ अधिकारियों की कार्यशैली की तुलना शुरू कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि इसके पहले भी जिले में कई अधिकारी पदस्थ रहे हैं और लोग कार्यालय के अंदर जाकर अपना आवेदन जमा करते रहे हैं लेकिन यह पहली बार है कि इस तरह कार्यालय को ही पार्टीशन लगाकर बंद कर दिया गया है।

पिछले कुछ दिनों से जिला परिवहन कार्यालय कोरबा में पदस्थ परिवहन निरीक्षक अतुल तिवारी के कमरे में एक गैर सरकारी कर्मचारी चंदन के काम करने का वीडियो सामने आया था जिसकी लिखित शिकायत कोरबा कलेक्टर से की गई है, जिसकी प्रतिलिपि प्रभारी डीटीओ को भी दिया गया था। लेकिन प्रभारी डीटीओ ने इस मामले को संज्ञान में लेने के बजाय अधिकारी को खुली छूट दे दिए थे जिसके कारण लगातार ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति हो रही थी जिसे समाचार के माध्यम से प्रसारित किया गया था।

ठीक ऐसा ही एक मामला शाखा प्रभारी विकास ठाकुर के कमरे में भी देखने को मिला था जिसमें शाखा प्रभारी अपने केबिन में कुछ कथित एजेंटों को बैठाकर उनसे काम की चर्चा करते हुए नजर आए थे। सूत्रों की माने तो एक युवक तो उनके कामों में भी हाथ बंटाता था जिसके लिए अलग से टेबल कुर्सी भी लगाया गया था।

इस तरह लापरवाही पूर्वक काम करने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कार्यवाही करने के बजाय आम लोगों को सताने की नियत से अपने केबिन से आगे पूरे कार्यालय को ही पार्टिशन लगाकर बंद कर दिया है। इस तरह पार्टिशन कर देने से कार्यालय में आने वाले पुरुष एवं महिलाओं को मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान होना पड़ रहा है। इस पूरे मामले में अब डीटीओ की कार्यशैली पर सवाल उठने लगा है।

पार्टिशन लगाने का आदेश और फंड पर उठा सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस तरह सरकारी कार्यालय को पार्टीशन लगाकर लोगों को कार्यालय के अंदर प्रवेश करने से वंचित करना कहां का नियम है। इसके अलावा इस तरह के पार्टीशन को लगाने के पहले क्या जिले के मुखिया से अनुमति लेना अनिवार्य था? और यदि हां तो क्या डीटीओ द्वारा अनुमति ली गई है? यदि हां तो कब और किस तरह की अनुमति दी गई है, जांच का विषय है। इसके अलावा इस पार्टीशन को करने में जो राशि व्यय की गई है उसकी स्वीकृति शासकीय मद से हुई है या फिर अधिकारी ने अपने निजी मद से कराया गया है यह भी सवालों के घेरे में हैं।
मूलभूत सुविधाओं से वंचित करना क्या सही?
जिला परिवहन कार्यालय एक पब्लिक कार्यालय है जहां पर सामान्य लोगों का आना-जाना लगा रहता है ऐसे में यहां पर महिला एवं पुरुष भी आते हैं और तत्काल कार्य नहीं होने के कारण उन्हें कार्यालय में इंतजार भी करना पड़ता है। ऐसे में उन्हें मूलभूत सुविधा जो उन्हें मिलनी चाहिए जैसे पेयजल, बैठने की व्यवस्था, सुलभ की सुविधा भी से भी वंचित होना पड़ रहा है। इस तरह से सिर्फ लोगों को परेशान होना पड़ रहा है, आखिरकार इसके लिए जिम्मेदार कौन है?

अवैध दुकानों को हटाने क्यों नहीं हो रही कार्यवाही?
कार्यालय के बाहर लगे दुकानों को हटाने में आखिरकार वर्तमान जिला परिवहन अधिकारी विवेक सिन्हा रुचि क्यों नहीं दिखा रहे है? यह सबसे बड़ा सवाल है क्योंकि कार्यालय के बाहर जितने भी दुकान संचालित हो रहे हैं वह अनाधिकृत है और सभी के सभी कथित एजेंट बनकर इस कार्यालय में दिन-रात प्रवेश करते हैं और सरकारी कामों में दखल देते हैं। ऐसे लोगों पर कार्यवाही करने के बजाय आम लोगों को परेशान करने के लिए इस तरह का पार्टीशन लगाया जाना क्या उचित है?

फोटो वीडियो सामने आने के बाद क्यों नहीं हुई कार्रवाई
जिला परिवहन कार्यालय में पदस्थ परिवहन निरीक्षक अतुल तिवारी के कमरे में एक गैर सरकारी कर्मचारी चंदन का काम करता हुआ वीडियो सामने आया था जिसकी जानकारी जिला परिवहन अधिकारी को भी दी गई थी, बावजूद आज दिनांक तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। आखिरकार क्या यह अधिकारी की स्वेच्छा चारित है या फिर एक गैर सरकारी कर्मचारी शासकीय कार्य को कर सकता है। ठीक ऐसे ही अतुल तिवारी विकास ठाकुर के कमरे में भी दो कथित एजेंट का वीडियो एवं फोटो वायरल हुआ था लेकिन उस पर भी अधिकारी ने कार्रवाई करने के बजाय मामले को दबाने में ही ज्यादा ध्यान दिया जिसके कारण आज भी मामले में कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।
DTO ने नहीं उठाया फोन
पार्टीशन लगाने के बारे में जानकारी चाहने जब प्रभारी डीटीओ विवेक सिन्हा से संपर्क किया गया तो उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया जिसके कारण उनका पक्ष नहीं मिल सका।
कलेक्टर एवं मुख्यमंत्री से होगी शिकायत
इस तरह एक सरकारी कार्यालय में अधिकारी द्वारा स्वेच्छा चारिता करते हुए जिस तरह से आम लोगों को परेशान किया जा रहा है यह बिल्कुल भी बर्दाश्त करने लायक नहीं है। जल्द इस मामले की शिकायत कलेक्टर एवं मुख्यमंत्री से की जाने की खबर है


