कोरबा – जिला परिवहन कार्यालय में अनाधिकृत लोगों का जमावड़ा दिन रात लगा रहता है जिसकी बानगी भी हर रोज देखने को मिल रही है। शाम के वक्त अधिकांशतः उन लोगों की भीड़ रहती है जो परिवहन कार्यालय के सामने अवैध कब्जा कर दुकानों का संचालन कर रहे हैं और कथित एजेंट बनकर कार्यालय के कामों में अपनी सीधी दखल देते हैं।


पिछले खबरों में आपने देखा था कि किस तरह से परिवहन निरीक्षक अतुल तिवारी द्वारा अपने पद एवं अधिकार का दुरुपयोग करते हुए चंदन नाम के एक अनाधिकृत व्यक्ति को अपने कमरे में बैठाकर कार्य करा रहे हैं जिसे पूछने पर वह अपना ड्राइवर बताता है। यह सिलसला अभी भी जारी है जिसको देखकर मन में सवाल भी उठने लगा है कि ये रिश्ता क्या कहलाता है?


इसके अलावा बाबू विकास ठाकुर द्वारा भी कथित एजेंटों को पनाह देने में पीछे नहीं है। इन बातों के सामने आने के बाद भी परिवहन अधिकारी द्वारा ना तो कोई ठोस कार्यवाही की जा रही है और ना ही इस पर विराम लगाने की पहल की जा रही है। इससे यह कहना गलत नहीं होगा कि ये सब अधिकारी के इशारों पर किया जा रहा है।

कार्यालय में गेट के सामने एक चपरासी भी तैनात की गई है जिसको सब लोग बड़े के नाम से पुकारते है जो पिछले लगभग 10 सालों से इस कार्यालय में काम कर रहा है। ऐसे में एक कर्मचारी के मौजूद होने के बाद भी ऐसे लोगों को प्रवेश कैसे और किसके कहने पर मिल रहा है या फिर वह अपने कर्तव्यों के विपरीत ऐसे लोगों को आने-जाने में रोक-टोक की बजाए सहयोग करता हैं? उन्हें खुला संरक्षण देता है? बड़ा सवाल है।

इस तरह अनाधिकृत लोगों की गतिविधियों से परिवहन कार्यालय की सरकारी दस्तावेजों की सुरक्षा और गोपनीयता पर सवाल खड़े होने लगा है। आखिरकार क्या कारण है कि ऐसे लोगों को कार्यालय के अंदर प्रवेश होने से नहीं रोका जा रहा है? ऐसे लोगों के पीछे किसका संरक्षण प्राप्त है जो खुलेआम अधिकारियों एवं कर्मचारियों के कमरों में दस्तक दे रहे हैं।
परिवहन कार्यालय है या फिर घूमने की जगह?
परिवहन कार्यालय में जिस तरह से अनाधिकृत लोगों/ कथित एजेंटो की भीड़ हर दिन लगी रहती है और ऐसे लोगों को जो प्रवेश दिया जा रहा है जिसके कारण कार्यालय अंदर भीड़ – भाड़ और शोर – शराबा भी होता रहता है। इस दृश्य को देखकर ऐसा लगता है कि यह कोई सरकारी कार्यालय है भी या नहीं या फिर कोई घूमने के लिए बनाया गया गार्डन है? यह बड़ा सवाल है।

आम लोगों के लिए खिड़की और कथित एजेंटों को सीधे कमरे में मिलता है प्रवेश
इस परिवहन कार्यालय में अलग अलग लोगों के लिए अलग तरह के व्यवहार किए जाते है। अक्सर देखने को मिलता है कि बिना एजेंट के आए लोगों को कार्यालय के गेट में तैनात चपरासी द्वारा खिड़की का रास्ता दिखा दिया जाता है जो अपने कामों को कराने के लिए एक खिड़की से दूसरी खिड़की की ओर झांकते रहते हैं वहीं कथित एजेंटों को बिना रोक टॉक किए सीधे अधिकारी एवं कर्मचारियों के केबिन के अंदर प्रवेश दिया जाता है। यह सब अधिकारी से छुपा भी नहीं है। आखिर ऐसा भेदभाव लोगों के साथ क्यों हो रहा है क्या इसकी सुध अधिकारी को नहीं लेनी चाहिए? लोगों के मन में आया सवाल है।
वर्तमान में जिला परिवहन कार्यालय की जिम्मेदारी संभाल रहे प्रभारी जिला परिवहन अधिकारी विवेक सिन्हा की मौजूदगी में यह सारा चीज हो रहा है। ऐसे में इस पूरे दृश्य को देखकर एक कहावत याद आ गई। कहावत है कि सैया भए कोतवाल तो डर किस बात की।
एक तरफ जहां पूरे प्रदेश में बीजेपी सुशासन सरकार का दावा कर रही है वहीं दूसरी तरफ जिला परिवहन कार्यालय कोरबा में अधिकारी ने सरकार के इस दावों को ही गलत ठहराने में लगी हुई है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन शिकायत के बाद ऐसे भ्रष्ट अधिकारी के ऊपर कब और किस तरह की कार्रवाई करती है


