छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में एक बार, फिर बड़ा अपडेट सामने आ रहा है। जहां चैतन्य बघेल की जमानत को चुनौती देने वाली छत्तीसगढ़ सरकार कि याचिका पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई।
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जिसमें, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ ने मामले में एक सप्ताह बाद सुनवाई करने की बात काही है। साथ ही सौम्य चौरसिया को हाई कोर्ट जाने के निर्देश दिए हैं।
बता दें, चैतन्य बघेल पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटें हैं, वहीं सौम्या चौरसिया भूपेश बघेल की उप सचिव रहीं हैं, जिन्हें बीते साल दिसंबर में शराब घोटाले के मामले में ईडी ने गिरफ्तार किया था।
जांच प्रभावित होने की आशंका
छतीसगढ़ सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने कोर्ट में कहा कि चैतन्य बघेल को जमानत मिलने के बाद एक अहम गवाह सामने नहीं आ रहा है। उन्होंने बताया कि ऐसी स्थिति में जांच प्रभावित हो सकती है। इसी आधार पर उन्होंने हाईकोर्ट द्वारा दिए गए जमानत आदेश पर दोबारा विचार करने की मांग की।
सौम्या की याचिका पर भी सुनवाई
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उप सचिव रही सौम्या चौरसिया की याचिका पर भी सुनवाई हुई। कोर्ट ने उन्हें सीधे राहत देने के बजाय छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट जाने का निर्देश दिया। सौम्या चौरसिया को कथित शराब घोटाले से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने पिछले साल दिसंबर में गिरफ्तार किया था।
गिरफ्तारी का मुद्दा उठाया गया
सौम्या चौरसिया की ओर से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कोर्ट में दलील दी कि जांच एजेंसियां बार बार नई एफआईआर दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर रही हैं। उन्होंने बताया कि अब तक सौम्या चौरसिया को छह बार हिरासत में लिया जा चुका है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उन्हें पहले हाईकोर्ट में जमानत याचिका दाखिल करनी चाहिए।
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हाईकोर्ट को सुनवाई के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट का कहना है की सौम्या चौरसिया एक सप्ताह के अंदर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर कर सकती हैं। जिसके साथ ही हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि वह उनकी याचिका पर प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई करे और दो सप्ताह के भीतर फैसला सुनाए।


