रायपुर : मंत्रालय के सभी विभागों में अब आधार आधारित बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली अनिवार्य कर दी गई है. प्रशासनिक कार्यकुशलता और समय की पाबंदी को मद्देनजर रखते हुए राज्य सरकार ने यह घोषणा की है. महानदी भवन के अलावा यह फैसला इंद्रावती भवन में सभी विभागों के लिए भी लागू होगा. मुख्य सचिव विकास शील की मौजूदगी में आला अफसरों के साथ हुई बैठक में नए सिस्टम का लाइव प्रदर्शन किया गया. जिसमें फेशियल ऑथेंटिकेशन आधारित उपस्थिति प्रणाली और दीवार पर लगाए गए आधार सक्षम बायोमेट्रिक उपकरणों का डेमो प्रस्तुतिकरण हुआ. इस प्रणाली का परीक्षण 20 नवंबर से शुरू होगा. वहीं 1 दिसंबर से मंत्रालय में इस सिस्टम के माध्यम से उपस्थिति अनिवार्य होगी.
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मुख्य सचिव विकास शील ने 1 जनवरी 2026 से यह प्रणाली सभी संचालनालयों, विभागाध्यक्ष कार्यालयों में भी लागू करने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि समय का पालन प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और सभी अधिकारियों, कर्मचारियों को कड़ाई से इसका पालन करना होगा. इधर कर्मचारियों के लिए उपस्थिति दर्ज करने के दो विकल्प उपलब्ध कराए गए हैं. इनमें मोबाइल एप के माध्यम से फेशियल ऑथेंटिकेशन के अलावा प्रवेश द्वारों पर लगे आधार सक्षम बायोमेट्रिक उपकरण के जरिए उपस्थिति दर्ज कराना शामिल है. दोनों प्रणालियां समानांतर रूप से संचालित होंगी. सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी निर्धारित प्रवेश द्वारों पर आधार सक्षम बायोमेट्रिक उपकरण स्थापित कर दिए हैं. वहीं नोडल अधिकारियों का प्रशिक्षण भी पूरा कर लिया है. सभी कर्मचारियों को यह सुनिश्चित करने निर्देश दिए गए हैं कि उनके आधार और सेवा संबंधी विवरण उपस्थिति पोर्टल में सही ढंग से अपडेट हों. नई उपस्थिति व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही, ढिलाई या अनुपालन न करने को गंभीरता से लिया जाएगा.
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जवाबदेह शासन व्यवस्था में अग्रसर साय
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि महानदी और इन्द्रावती भवन के सभी विभागों में आधार आधारित बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली का क्रियान्वयन पारदर्शिता, समयपालन और प्रशासनिक दक्षता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. मैं अपेक्षा करता हूँ कि सभी अधिकारी और कर्मचारी पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करेंगे. ताकि हम आधुनिक, तकनीक-आधारित और जवाबदेह शासन व्यवस्था की ओर अग्रसर हो सकें.


