कोरबा – एसईसीएल कुसमुंडा प्रबंधन एक बार फिर से सुर्खियों में है। मामला प्रबंधन और चहेते ठेकेदार से जुड़ा हुआ है। प्रबंधन पर कर्मचारियों की सुविधाओं की अनदेखी कर अपने चहेते ठेकेदार को फायदा पहुंचाने का गंभीर आरोप बीते कुछ महीनो से लग रहा है बावजूद जिम्मेदार अपनी जिम्मेदारियों से दूर कुंभकरण की नींद में सोए हुए नजर आ रहे हैं। आलम यह है कि जिम्मेदार के कान में जू तक के नहीं रेंग रही है।

एक तरफ जहां खदान विस्तार के लिए प्रबंधन द्वारा एक – एक इंच जमीन के लिए जद्दोजहद किया जा रहा है, वहीं कुसमुंडा के ह्रदयस्थल नेहरू नगर स्थित पानी टंकी मैदान की कई एकड़ भूमि पर चर्चित ठेकदार सांप की तरह कुंडली मारकर बैठा हुआ है। यह नजारा किसी से छुपा हुआ नहीं है जहां ठेकदार द्वारा अपने दर्जनों नए और कबाड़ हो चुके वाहनों को खड़ा कर कब्जा किया हुआ है।
इस मैदान का एक हिस्सा खाली पड़ा हुआ है जिसमें श्रमिक संगठन द्वारा जनहित और यातायात व्यवस्था को दृष्टिगत रखते हुए चौपाटी बनाने की लगातार मांग कर रहा है परंतु कुसमुंडा प्रबंधन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। श्रमिक संगठन बीएमएस द्वारा एक बार फिर 28 फरवरी 2026 को गायत्री मंदिर चौक ये सड़क पर लगने वाले सभी सब्जी,फल, जूस और खाने पीने के ठेले दुकान को इसी मैदान में शिफ्ट करने की मांग की जा रही है।

आपको बता दें गायत्री मंदिर चौक में सड़क किनारे लगाए जाने वाले दुकानों से लगातार जाम लगता है जिससे कर्मचारियों को खदान अथवा ऑफिस जाने में असुविधा होती है। नेहरू नगर पानी टंकी के इस मैदान में दुकानें लगने से आसपास के सभी कॉलोनीवासी यहां आ सकते है और यहां पार्किंग भी की जा सकती है। परंतु कुसमुंडा प्रबंधन अपने कर्मचारियों के हित को ध्यान में रखने के बजाय एक करोड़पति ठेकदार को फायदा पहुंचाने का काम कर रही है। इस ठेकदार का कई एकड़ मैदान पर कब्जा है, मैदान अंदर 10 – 10 लाख की लागत से बने कई वातानुकूलित भवन भी कब्जा में लिए गए है जो कि SECL के पैसे से बनाए गए है।
परंतु दुर्भाग्य की बात है कि एसईसीएल कुसमुंडा प्रबंधन कार्रवाई करने के बजाय चुप बैठी हुई है। इससे यह कहना गलत नहीं होगा कि जिम्मेदार मुखिया का भी ठेकेदार को मौन स्वीकृति मिली हुई है। समय रहते यदि प्रबंधन द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती है तो निश्चित ही आने वाले समय में इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।


