कोरबा – एसईसीएल कुसमुंडा खदान में कोयला हेराफेरी का बड़ा मामला सामने आया है। खदान में सुरक्षा के लिए तैनात करोड़ों रुपए की त्रिपुरा राइफल्स के जवान स्वयं सुरक्षा में सेंध लगाकर कैम्पर गाड़ी में खुलेआम कोयला ले जाते नजर आए जिसका वीडियो भी सामने आया है। कोयले से भरी कैम्पर को जब लोगों के द्वारा रोका गया तो कैम्पर गाड़ी में वर्दी पहना हुआ त्रिपुरा का जवान अपना बचाव करते हुए नजर आया और गाड़ी में लोड कोयले को मेस के लिए ले जाने की बात कही गई। इस वीडियो के सामने आते ही एक बार फिर SECL कुसमुंडा प्रबंधन और करोड़ों रुपए की त्रिपुरा राइफल्स सुरक्षा एजेंसी की कार्यशैली पर लोगों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।

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आपको बता दे कि जहां एक तरफ पूरे देश भर में सरकार द्वारा प्रदूषण को कम करने के लिए उज्ज्वला योजना अंतर्गत गरीब वर्ग को निःशुल्क रसोई गैस दिया जा रहा है और सभी वर्ग के लोगों को खाना बनाने रसोई गैस का उपयोग करने जागरूक किया जा रहा है ताकि प्रदूषण को कम किया जा सके तो वहीं दूसरी तरफ SECL कुसमुंडा खदान में करोड़ों रुपए की सुरक्षा एजेंसी मेस के लिए कोयला ले जाने की बात कह कर अपना बचाव कर रही है। आखिरकार इस बात में कितनी सच्चाई है? लोगों को कहना है कि त्रिपुरा राइफल्स के जवान खदान में कैम्पर गाड़ी से कोयला किसकी अनुमति में बाहर लेकर आए? वहीं लोगों का यह भी कहना है कि क्या SECL प्रबंधन की मौन स्वीकृति है? बड़ा सवाल है।

खदान में उत्पादित कोयला सरकार की संपत्ति है जिस पर सिर्फ और सिर्फ सरकार का अधिकार है जिसके बिक्री, परिवहन एवं उपयोग की अनुमति सरकारी निर्देशों पर है। खदान के अंदर से कोई भी कर्मचारी या अधिकारी एक कोयले का टुकड़ा भी बगैर अनुमति के बाहर नहीं ला सकता वहीं सुरक्षा में तैनात त्रिपुरा के जवान कैंपर गाड़ी में भरकर कोयला खदान से बाहर ले आए। क्या रक्षक ही भक्षक बनकर सरकार को चुना लगाने में लगे हुए हैं? क्या वर्दी का उपयोग ऐसे कामों के लिए किया जा रहा है?

इस पूरे मामले में न सिर्फ सुरक्षा एजेंसी सवालों के घेरे में है बल्कि SECL कुसुंडा प्रबंधन की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े होने शुरू हो गए हैं। SECL कुसमुंडा खदान में सुरक्षा में तैनात त्रिपुरा एजेंसी SECL प्रबंधन के दिशा निर्देश पर कार्य कर रही है। ऐसे में खदान से इतनी बड़ी मात्रा में कोयला बाहर कैसे निकल गई? क्या इस बात की भनक SECL प्रबंधन को नहीं हुई या फिर SECL प्रबंधन द्वारा रची गई भ्रष्टाचार का हिस्सा है जो अब सामने आने लगा है?

त्रिपुरा के जवानों के द्वारा इस तरह मेस के नाम पर ले जाए जा रहे कोयल की मात्रा खदान में उत्पादित कोयले के स्टॉक से कैसे मिलान किया जाएगा? और बाहर निकाले गए कोयले से सरकार को होने वाले राजस्व की क्षति के लिए कौन ज़िम्मेदार है? और इसकी भरपाई कौन करेगा? यह भी एक बड़ा सवाल है।

SECL कुसमुंडा प्रबंधन की लापरवाही लगातार सामने आ रही है इसके पहले भी हमने खबर के माध्यम से बताया था कि किस तरह से कुसमुंडा खदान में सुरक्षा में सेंध लगाकर बगैर अनुमति के लोडर चलाए जा रहे थे। क्या सुरक्षा एजेंसी द्वारा तैनात किए गए त्रिपुरा राइफल्स के कर्मचारी भ्रष्टाचार में शामिल है?
सूत्रों की माने तो खदान में सुरक्षा के लिए तैनात त्रिपुरा के सुरक्षाकर्मी और SECL कुसमुंडा प्रबंधन दोनों जी माया के खेल के सामने नतमस्तक हैं और लंबे समय से इस तरह के कारनामे करते आ रहे हैं। करोड़ों की सुरक्षा एजेंसी और प्रबंधन पर ऐसा गंभीर आरोप लगना लाजिमी भी है क्योंकि कुसमुंडा खदान के प्रवेश द्वार पर नई तकनीकी के बूम बैरियर लगाए गए हैं जिसमें खदान के अंदर उन्हीं गाड़ियों को प्रवेश मिलता है जिन गाड़ियों में प्रवेश देने कार्ड लगाए गए हो जिसको बूम बैरियर में लगे सेंसर के द्वारा रीड करने पर ऑटोमेटिकली बैरियर खुल जाता है। ऐसे में बगैर अनुमति के आधा दर्जन से भी अधिक लोडर खदान अंदर कैसे घुस गए? क्या इसके पीछे भी माया का खेल चल रहा है? और यदि हां तो इस माया के खेल में कौन-कौन शामिल है और इस खेल का मुखिया कौन है?

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अब देखना होगा कि मामला सामने आने के बाद SECL कुसमुंडा प्रबंधन इस मामले में संज्ञान लेते हुए दोषियों के खिलाफ कार्यवाही करेगी या फिर माया के खेल के सामने आगे भी नतमस्तक रहेंगे?


