सक्ती – जिले में चर्चित सेवा सहकारी समिति पतेरापाली सोसायटी में संस्था प्रबंधक की लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है। धान खरीदी के लिए इस समिति को दिया गया लाखों रुपए कीमती बारदाना बंद पड़े कार्यालय के बाहर खुले में सड़क किनारे रखा हुआ है जिसकी सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े होने शुरू हो चुके है।
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आपको बता दे जिले भर में धान खरीदी शुरू हो चुका है, पतेरापाली सोसायटी में भी धान खरीदी सुचारू रूप से चालू है जो मुख्य मार्ग से लगभग 500 मीटर अंदर चल रहा है। इस जगह पर पंजीकृत किसानों के द्वारा धान लाया जा रहा है जहां खरीदी का कार्य संपन्न कराया जा रहा है। खरीदी केंद्र के पास ही सड़क किनारे रखे बारदाने का उपयोग होना है जिसे अब तक सुरक्षित नहीं रखा गया है। बारदाना चोरी होने की संभावना नजर आ रही है। इस मंजर को देखकर हर कोई हैरान है जिसमें संस्था प्रबंधक की घोर लापरवाही नजर आ रही है।
सबसे बड़ी बात यह है कि मुख्य मार्ग में इस तरह से असुरक्षित रखे बारदाने को लेकर उच्च अधिकारियों की नजर कैसे नहीं पड़ रही है। अगर बारदाना चोरी हो जाता है तो उसकी भरपाई कौन करेगा और चोरी हो जाने के बाद किसानों को जो समस्या आएगी उसका निपटारा कैसे और कौन करेगा यह सबसे बड़ा सवाल लोगों के मन में है।
हैरानी वाली बात तो यह है कि इस समिति में कैडर के ही कर्मचारी रमन साहू को संस्था प्रबंधक की मुख्य जिम्मेदारी दी गई है फिर भी इनके द्वारा लापरवाही बरती जा रही है जबकि कर्मचारी परिवीक्षा अवधि में है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि संस्था प्रबंधक रमन साहू को उच्च अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है?
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संस्था प्रबंधक रमन साहू ने कलेक्टर आदेश पर भी अपनी मनमानी की है जिसका प्रमाण भी मौजूद है। ऐसे में एक जिम्मेदार अधिकारी अपने कर्तव्य के प्रति कितने बेपरवाह है यह तो किसी से छुपी नहीं है। लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि ऐसे लापरवाह कर्मचारी के ऊपर अब तक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं हो सकी है जिसके कारण इनका मनोबल बढ़ता हुआ नजर आ रहा है। आखिरकार संस्था प्रबंधक को किसका संरक्षण प्राप्त है? जांच होनी चाहिए।
प्राधिकृत अध्यक्ष की भूमिका पर भी उठा सवाल
छत्तीसगढ़ में नई सरकार बनने के बाद सभी समितियों में प्राधिकृत अध्यक्ष के रूप में मनोनीत करते हुए पदस्थ किया गया है ताकि धान खरीदी से लेकर अन्य सभी कार्यों में किसानों को कोई दिक्कत ना हो और शासन का महत्वपूर्ण कार्य अच्छे से संपन्न कराया जा सके। इस क्रम में पतेरापाली समिति में बुद्धेश्वर साहू को प्राधिकृत अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी दी गई है। लेकिन प्राधिकृत अध्यक्ष के होते हुए भी संस्था प्रबंधक की मनमानी चरम पर नजर आ रही है। खरीदी प्रभारी भी दूसरे को बना दिया गया। ऐसे में प्राधिकृत अध्यक्ष द्वारा संस्था प्रबंधक के खिलाफ किसी प्रकार की कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे हैं? क्या प्राधिकृत अध्यक्ष की मौन स्वीकृति प्राप्त है? और यदि नहीं तो क्या संस्था प्रबंधक के खिलाफ कार्यवाही होगी? बड़ा और गंभीर प्रश्न है।
अब देखना होगा की खबर प्रशासन के बाद जिम्मेदार विभाग के अधिकारी इस पर क्या कार्रवाई करते हैं।


