सक्ती – जिले में पूर्व से चर्चित सेवा सहकारी समिति पतेरापाली एक बार फिर से सुर्खियों में है। इस बार मामला कैडर के कर्मचारी रामन साहू से जुड़ा हुआ है। पतेरापाली समिति में संस्था प्रबंधक जैसे महत्वपूर्ण पद पर होने के बाद भी रामन साहू अपने कर्तव्यों के प्रति निष्क्रिय नजर आ रहे है।
बैंक के उच्चाधिकारियों के कड़े निर्देश मिलने के बावजूद समिति द्वारा पूर्व में वितरण किए गए केसीसी लोन की राशि की वसूली पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। कालातीत लोन की वसूली के लिए धारा – 84 की नोटिस भी समय पर नहीं दी गई जिसके कारण आज भी लाखों रुपए की वसूली शेष रह गई है।
यही नहीं इस बार धान खरीदी 2025 – 26 के लिए कलेक्टर द्वारा जारी जिले की सूची में इन्हें पतेरापाली समिति में धान खरीदी प्रभारी बनाया गया था। लेकिन रामन साहू ने कलेक्टर द्वारा जारी आदेश की भी अनदेखी करने से गुरेज नहीं किया। आलम यह है कि उसने अपनी जगह पर किसी और को खरीदी प्रभारी बना दिया है। अब सवाल यह है कि क्या इस बात की जानकारी कलेक्टर को है? इस तरह परिवीक्षा अवधि में रामन साहू की मनमानी पर लोगों ने सवाल खड़े शुरू कर दिए हैं जिसकी शिकायत कलेक्टर सहित विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों तक की जाएगी।
सूत्रों की माने तो इस समिति के संस्था प्रबंधक के ऊपर मनमानी का गंभीर आरोप लगाया गया है। सूत्रों का दावा है कि समिति के पंजीकृत किसानों ने आरोप लगाया था कि उन्हें समय पर खाद का वितरण नहीं किया गया जिसके कारण उन्हें अनावश्य समस्याएं हुई है और आर्थिक क्षति भी हुई जिसकी लिखित शिकायत भी करते हुए इनको हटाने की मांग की गई थी जिसकी जांच अभी भी लंबित है।
समिति के ऑडिट रिपोर्ट की हो पुनः जांच
सूत्रों का कहना है कि खरीफ वर्ष 2023 – 24 में 2024 – 25 में केसीसी ऋण में जमकर भ्रष्टाचार किया गया था। अपात्र लोगों को पात्र मानते हुए तत्कालीन संस्था प्रबंधक, कंप्यूटर ऑपरेटर, सुपर वाइजर एवं प्राधिकृत अधिकारी द्वारा जानबूझकर परीक्षण – निरीक्षण में घोर लापरवाही बरती गई थी जिसके कारण मानक से भी अधिक राशि का वितरण कर दिया गया था, जो की पूरी तरह से गलत था फिर भी ऑडिटर द्वारा इस पर कोई आपत्ति दर्ज नहीं की गई जी समझ से परे है। ऐसे में समिति के ऑडिट रिपोर्ट पर भी सवाल उठने लगा है जिसकी जांच करने से सच्चाई खुद ही सामने आ जाएगी।
खाद वितरण में हुई गड़बड़ी?
सूत्रों से खबर मिल रही है कि खरीफ फसल 2025 – 26 के लिए खाद वितरण में संस्था प्रबंधक रामन साहू के ऊपर गड़बड़ी करने का गंभीर आरोप लगा था। कुछ किसानों ने इसकी शिकायत करते हुए जांच की मांग की थी जो अभी भी लंबित है। सूत्रों की माने तो खाद वितरण के लिए जो मानक बनाए गए थे उसका पालन न करते हुए अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने खाद की कालाबाजारी की गई है। लोगों का कहना है कि समिति द्वारा खरीफ फसल 2025 – 26 के लिए वितरण की गई खाद एवं रकबा का मिलान करने से गड़बड़ी खुद ही सामने आ जाएगी।
ऋण पर लगने वाले ब्याज की भरपाई कौन करेगा?
समिति के कई ऐसे पंजीकृत किसान हैं जिन्होंने पिछले लंबे समय से समिति से केसीसी ऋण लेने के बाद भुगतान समय पर नहीं किया था जिसके कारण आज भी उनके द्वारा।ली गई केसीसी लोन की राशि बकाया है। इसके अलावा कुछ लोगों ने समय सीमा खत्म होने के बाद लोन की राशि तो जमा कर दी थी लेकिन उसका ब्याज जो समिति के ऊपर अनिवार्य रूप से लागू होता है की वसूली नहीं की गई और ना ही वसूली फेहरिस्त में इसका गणना करते हुए शेष वसूली राशि निर्धारित की गई थी जिससे भविष्य में समिति के ऊपर एक बड़ा आर्थिक संकट होने वाली है जिसके लिए जिम्मेदार कौन है? यह बड़ा सवाल है और भविष्य में इसकी भरपाई कौन करेगा?
वसूली फेहरिस्त में हुई गड़बड़ी?
धान खरीदी के पूर्व ही सभी समितियों में किसानों द्वारा लिए गए केसीसी ऋण राशि की वसूली करनी होती है जिसके लिए वसूली फेहरिस्त जारी कर दी जाती है ताकि लोन लेने वाले किसानों को इसकी सही जानकारी मिल सके और समय पर अपने कर्ज को चुका सके जो की पतेरापाली समिति में भी बनाई गई है। लेकिन सूत्रों की माने तो वसूली फेहरिस्त में कालातीत किसानों की सूची सार्वजनिक नहीं की गई है और ना ही ब्याज की राशि का गणना किया गया है। आखिरकार आधी – अधूरी वसूली फेहरिस्त बनाकर संस्था प्रबंधक, कंप्यूटर ऑपरेटर और प्राधिकृत अध्यक्ष किसको गुमराह करना चाहते हैं? और किसको लाभ पहुंचाने के लिए ऐसा किया जा रहा है? क्या इस खेल के पीछे पर्दे में कोई और भी शामिल है? यह जांच का विषय है।


