नई दिल्ली। संसद के शीतकालीन सत्र में लगातार हो रही रुकावटों और हंगामे के बीच कांग्रेस नेता और सांसद शशि थरूर ने विपक्ष को ही कठघरे में खड़ा कर दिया। थरूर ने एक बार फिर पार्टी लाइन से हटकर ऐसा बयान दिया है, जिससे साफ संकेत मिलता है कि उनकी विचारधारा और कांग्रेस नेतृत्व के बीच मतभेद अब भी कायम हैं।
“सांसदों को जनता प्रतिनिधित्व के लिए भेजती है, शोर मचाने के लिए नहीं” — थरूर
शशि थरूर ने कहा कि संसद में सांसदों का मूल कर्तव्य ‘जनता का प्रतिनिधित्व’ करना है। उन्होंने बिना किसी लाग-लपेट के कहा—
“लोग हमें प्रतिनिधित्व करने के लिए भेजते हैं, न कि चिल्लाने के लिए। मैंने यह बात हमेशा कही है।”
थरूर के इस बयान ने विपक्ष की संसद में बार-बार हो रही बाधाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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“सोनिया गांधी समेत पार्टी नेतृत्व जानता है मेरी राय”
थरूर ने आगे कहा कि कांग्रेस नेतृत्व, जिसमें सोनिया गांधी भी शामिल हैं, उनकी सोच और दृष्टिकोण को भली-भांति जानते हैं। उन्होंने कहा—
“हो सकता है कि मैं पार्टी में अकेली आवाज हूं, लेकिन मेरी राय हमेशा स्पष्ट रही है।”
उनके इस बयान से यह भी संकेत मिलता है कि वे संसद की कार्यवाही को बाधित करने की रणनीति से सहमत नहीं हैं।
कांग्रेस के भीतर बीते दिनों से मतभेद की चर्चाएं
शशि थरूर पिछले कई मौकों पर पार्टी की आधिकारिक लाइन से हटकर अपनी राय रखते आए हैं। इससे पहले भी उन्होंने संसद की कार्यवाही को सुचारु रूप से चलाने के पक्ष में बयान दिया था।
उनकी इस स्वतंत्र और स्पष्टवादी शैली के कारण वे कई बार पार्टी में अलग-थलग नजर आते हैं, लेकिन उनका कहना है कि वे लोकतांत्रिक मूल्यों और संसद की गरिमा के लिए ऐसा करते हैं।
शीतकालीन सत्र में बार-बार हंगामा
संसद का मौजूदा शीतकालीन सत्र विपक्ष के लगातार विरोध और नारेबाजी के कारण बाधित हो रहा है। कई महत्वपूर्ण विधेयक और चर्चाएँ प्रभावित हुई हैं, जिस पर शशि थरूर सहित कई वरिष्ठ सांसद चिंता जता चुके हैं।


