नई दिल्ली। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रेसिडेंट मौलाना महमूद मदनी ने अपने हालिया जिहाद वाले बयान पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि उनके शब्दों को गलत संदर्भ में समझा गया। उन्होंने कहा कि उनके बयान से यदि कोई कन्फ्यूजन हुआ है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी वे खुद लेते हैं।
मौलाना मदनी ने न्यूज एजेंसी ANI को दिए इंटरव्यू में कहा कि उनका उद्देश्य जिहाद के वास्तविक, ऐतिहासिक और पवित्र अर्थ को सामने लाना था, लेकिन वे यह सुनिश्चित नहीं कर पाए कि इसका गलत मतलब न निकाला जाए।
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क्या था विवादित बयान?
29 नवंबर को भोपाल में आयोजित जमीयत की नेशनल गवर्निंग बॉडी की बैठक के दौरान मौलाना मदनी ने कहा था कि—
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“इस्लाम और मुसलमानों के दुश्मनों ने ‘जिहाद’ को हिंसा, झगड़े और गाली का पर्याय बना दिया है।”
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“लव जिहाद, लैंड जिहाद, थूक जिहाद, तालीम जिहाद, वोट जिहाद जैसे शब्दों का इस्तेमाल मुसलमानों की आस्था को नीचा दिखाने के लिए किया जा रहा है।”
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“दुर्भाग्य से सरकार और मीडिया के कुछ लोग भी ऐसे अपमानजनक शब्दों का उपयोग करने में संकोच नहीं करते।”
उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रियाएँ सामने आईं।
मदनी का स्पष्टीकरण
मदनी ने कहा कि उन्होंने केवल जिहाद शब्द के वास्तविक अर्थ और उसके सकारात्मक पहलुओं को रेखांकित करने की कोशिश की थी। उनका दावा है कि—
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बयान का उद्देश्य समुदाय के भीतर गलतफहमियों को दूर करना था।
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इसे राजनीतिक रंग देकर गलत दिशा में पेश किया गया।
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जिहाद शब्द को हिंसा या नफरत से जोड़ना गलत है।
सोशल मीडिया पर बहस जारी
मदनी के बयान और उसके बाद आई सफाई ने सोशल मीडिया पर बहस को और तेज कर दिया है। कुछ लोग उनके स्पष्टीकरण को उचित मान रहे हैं, जबकि कई लोग इसे विवाद शांत करने की कोशिश बता रहे हैं।


