कोरबा – जिला परिवहन अधिकारी विवेक सिन्हा के खिलाफ कार्यवाही करने कलेक्टर से लिखित शिकायत की गई है। मामला परिवहन कार्यालय में लगाए गए पार्टीशन से जुड़ा हुआ है।

प्राप्त जानकारी अनुसार जिला परिवहन अधिकारी विवेक सिन्हा द्वारा पोस्टिंग के बाद से ही अपने पद एवं अधिकार का दुरुपयोग करते आ रहे हैं। कार्यालय अंदर गैर अनाधिकृत लोगों से कार्य कराया जा रहा है जिससे विभाग की गोपनीयता भंग हो रही है। इसी तरह अधिकारी द्वारा मनमानी करते हुए परिवहन कार्यालय में अलग से पार्टीशन लगाकर आम जनता को परेशान करना शुरू कर दिया है। कार्यालय में पार्टीशन लग जाने के कारण लोगों को मूलभूत सुविधा जैसे पेयजल, शौचालय एवं कार्य कराने प्रतिक्षा करने हेतु लोगों को परेशान होना पड़ रहा है।
अधिकारी द्वारा सुशासन सरकार के निर्देशों को ठेंगा दिखाते हुए लोगों को परेशान करने की नियत से खिड़कियों के माध्यम से आवेदन देने के लिए मजबूर किया जा रहा है जबकि ऐसा कभी नहीं हुआ है। वही उनके चाहते लोगों को कार्यालय के अंदर प्रवेश दी जा रही है। इस तरह की दोहरी नीति से आम जनता परेशान है।
कोरबा डीटीओ ने परिवहन कार्यालय में लगाया पार्टिशन, जल्द होगी शिकायत
जिले का यह पहला सरकारी कार्यालय है जहां अपने काम के लिए कार्यालय आए आम लोगों को कार्यालय अंदर प्रवेश करने से रोक जा रहा है जिसके लिए बकायदा पार्टिशन लगा दिया है। अधिकारी की इस मनमानी की चर्चा अब शहर में होने लगी है वहीं सरकार के प्रति लोगों में रोस व्याप्त होने लगा है।

महत्वपूर्ण बात यह भी है कि जिला परिवहन अधिकारी विवेक सिन्हा को दो अलग-अलग जिले का प्रभार दिया गया है जिसमें कोरबा जिला अतिरिक्त प्रभार में है। दो जिले का प्रभार मिलने से अधिकारी सप्ताह में एक या दो दिन ही कार्यालय में बैठते हैं जिसके कारण अनेकों कार्यों के लिए आम लोगों को अधिकारी की अनुपस्थिति में बैरंग लौटना पड़ता है जिससे लोगों को मानसिक, आर्थिक एवं शारीरिक परेशानियां भी हो रही है।

सूत्रों की माने तो मार्किंग के नाम पर भी आम लोगों के पेपर को वापस कर दिए जाते हैं। शाखा प्रभारियों का कहना है कि अधिकारी के मार्किंग वाला दस्तावेज ही लिया जाना है ऐसे में इस तरह का मार्किंग करके पेपर प्रस्तुत करना आखिरकार किस तरह का नियम है? और इसके लिए शासन द्वारा क्या निर्देश प्राप्त है? यह बड़ा सवाल है।
इस पूरे मामले की लिखित शिकायत जिला कलेक्टर श्री अजीत वसंत से की गई है, वहीं इसकी प्रतिलिपि मुख्यमंत्री, परिवहन मंत्री, परिवहन आयुक्त और परिवहन अधिकारी को दी गई है। अब देखना होगा कि इस मामले में कब और क्या कार्रवाई होती है? और कब आम लोगों को उनकी परेशानियों से छुटकारा मिलेगा।


