कोरबा – एसईसीएल कुसमुंडा में घटिया निर्माण की एक और बानगी सामने आई है। पहले एपिसोड में हमने गेवरा बस्ती सोसायटी से खोडरी जाने वाली करोड़ों रुपए की सी.सी. रोड के घटिया निर्माण को उजागर किया था जिसकी शिकायत भी होने की खबर है। इसी बीच सिविल विभाग के अधिकारियों की एक और लापरवाही देखने को मिल रही है।
SECL कुसमुंडा द्वारा बनाई गई करोड़ों की सड़क 1 साल भी नहीं टिकी

ताजा मामला SECL कुसमुंडा क्षेत्र अंतर्गत हनुमान मंदिर से लेकर चर्च, WTP और स्टेडियम रोड विकास नगर का है। इस सड़क के दोनों तरफ पेवर ब्लॉक लगाने का काम किया जा रहा है। इस कार्य की गुणवत्ता को लेकर नगर में खूब चर्चा हो रही है। सड़क किनारे लगाए जा रहे पेवर ब्लॉक अभी से उखड़ने लगे है, वहीं कई जगहों पर धस भी गए हैं जिसकी तस्वीर भी सामने आई है फिर भी SECL कुसमुंडा के सिविल विभाग के जिम्मेदार अधिकारी को ये सब नजर नहीं आ रहा है।

इस तस्वीर को गौर से देखिए, किस तरह से कार्य को कराया जा रहा है। आप देख सकते हैं कई जगहों पर पेवर ब्लॉक नीचे धसने लगा है। वही कई जगहों पर स्थिति ऐसी भी है कि पेवर ब्लॉक के ऊपर बड़ी मात्रा में रेत डंप कर दिया गया है। इस तरह हो रहे निर्माण को लेकर जिम्मेदार अधिकारी की चुप्पी से कई सारे सवाल उठने लगे हैं।

आपको बता दें एसईसीएल ने 7100 वर्ग मीटर क्षेत्रफल के लिए लगभग 58 लाख रुपए का टेंडर जारी किया गया है। प्रत्येक वर्ग मीटर के लिए 795 रुपए की राशि भुगतान होना है। इतनी बड़ी राशि मिलने के बावजूद सिविल विभाग के जिम्मेदार अधिकारी जिनकी देख – रेख में पूरा काम चल रहा है, वे अपनी स्वेच्छा चारिता करते हुए घटिया निर्माण कराने में लगे हुए हैं जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण भी सामने है। बावजूद एसईसीएल प्रबंधन सिविल विभाग के ऐसे अधिकारियों के ऊपर शिकायत मिलने के बावजूद कोई कड़ी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं जिसके कारण उनकी स्वेच्छाचारिता और मनोबल दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है।

एसईसीएल प्रबंधन द्वारा क्षेत्र में कराए जा रहे ऐसे कार्य निश्चित रूप से यहां के स्थानीय लोगों को लाभ दिलाने के उद्देश्य से किया जा रहा है। लेकिन अधिकारियों की मंशा इसके विपरीत नजर आ रही है। यही कारण है कि घटिया निर्माण निरंतर हो रहे हैं। ऐसे निर्माण से उसके टिकाऊ होने और भविष्य में लोगों को अधिक समय तक लाभ कैसे मिलेगा यह बड़ा सवाल है।
एसईसीएल कुसमुंडा प्रबंधन को चाहिए कि ऐसे मामले सामने आने के बाद तत्काल टीम गठित करते हुए मौके की जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें। अब देखना होगा कि इस मामले में प्रबंधन द्वारा कब और किस तरह की जांच कराएगी? और जहां-जहां निर्माण में गड़बड़ियां हुई है उसको कब सुधारा जाएगा यह तो आने वाले समय में ही पता चलेगा।


