सक्ती – जिले में खाद की कालाबाजारी मामले में भ्रष्टाचारियों को बचाने ARCS मनीष ने जांच में स्वेच्छा चारिता शुरू कर दी है। अधिकारी द्वारा 14 किसानों के कलमबद्ध बयान को झुठलाने की पूरी साजिश रची जा रही है जिसमें जांच अधिकारी की कार्यशैली से अब जांच पर सवाल सुलगने लगा है। पूरा मामला पतेरापाली सोसायटी का है।
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सेवा सहकारी समिति पतेरापाली के संस्था प्रबंधक रमन साहू के ऊपर किसानों ने खाद नहीं देने का गंभीर आरोप लगाया है वही कई किसानों ने नाम पर खाद की मात्रा को बढ़ाकर वित्तीय घोटाला किया गया है जिसके प्रमाण भी मिल चुके हैं।
किसानों की शिकायत होने के बाद मामले की जांच वरिष्ठ कृषि अधिकारी जितेंद्र साहू ने की थी जिसमें किसानों की शिकायत को सही पाया था तथा संस्था प्रबंधक रमन साहू को जवाब प्रस्तुत करने नोटिस भी दिया था परन्तु रमन साहू ने कोई जवाब नहीं दिया।
जांच उपरांत SADO जितेंद्र साहू ने अग्रिम कार्यवाही करने उप संचालक कृषि को प्रतिवेदन दिया है।
सूत्रों की माने तो इस मामले की जांच कर कार्यवाही करने सहायक आयुक्त सहकारी संस्थाएं सक्ती ARCS मनीष खोपरागढ़ एवं नोडल अधिकारी अश्वनी पांडे को दी गई है। लेकिन जांच अधिकारी द्वारा इस मामले की जांच करने के बजाय दबाया जा रहा है।
सूत्रों का यह भी कहना है कि ARCS मनीष द्वारा लगातार भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है जिसमें देवरघटा, कलमा, बड़े कटेकोनी और बघौद में फर्जी KCC लोन घोटाला भी शामिल है।
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ऐसे भ्रष्ट अधिकारी की स्वेच्छा चारिता और संरक्षण के कारण सहकारिता विस्तार अधिकारी नारायण सोनी और वरिष्ठ सहकारिता विस्तार आधिकारी राम कुमार चौबे की मनमानी चरम पर पहुंच गई है।
इस पूरे मामले में ARCS मनीष खोपरागढ़ की मनमानी स्पष्ट नजर आ रही है जिसकी केंद्रीय कृषि मंत्री सहित मुख्यमंत्री एवं कलेक्टर से शिकायत करते हुए कार्यवाही करने मांग की जाएगी।


