कोरबा : शिक्षक दिवस पर कोरबा के एकलव्य विद्यालय छुरी में एक अलग ही तस्वीर देखने को मिली। आमतौर पर प्रशासनिक जिम्मेदारियों में व्यस्त रहने वाले कलेक्टर कुणाल दुदावत इस दिन बच्चों के बीच पहुंचे तो उनकी भूमिका एक अधिकारी की नहीं, बल्कि एक शिक्षक की थी। वे कक्षा में विद्यार्थियों के बीच बैठे, उनसे वन-टू-वन संवाद किया और उन्हें मेहनत, अनुशासन, दृढ़ निश्चय और अपने लक्ष्य के प्रति एकाग्र रहने का पाठ पढ़ाया। लेकिन कलेक्टर का यह दौरा सिर्फ बच्चों को प्रेरित करने तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने विद्यार्थियों से उनकी पढ़ाई, भोजन, आवास, पानी और स्कूल की व्यवस्थाओं के बारे में सीधे जानकारी ली। बच्चों ने अपनी समस्याएं बताईं तो कलेक्टर ने उन्हें गंभीरता से सुना और शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए मौके पर ही कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए।
कक्षा में विद्यार्थियों के बीच बैठकर कलेक्टर ने कहा कि…विद्यार्थी जीवन दोबारा लौटकर नहीं आता। यही वह समय है जब पूरी मेहनत और लगन से अपने सपनों की नींव रखी जा सकती है। उन्होंने बच्चों को समझाया कि सफलता के लिए सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बल्कि अनुशासन, मेहनत, दृढ़ निश्चय, समर्पण और लक्ष्य पर लगातार नजर जरूरी है। कलेक्टर ने विद्यार्थियों से कहा कि माता-पिता की उम्मीदों को पूरा करने का सबसे अच्छा रास्ता ईमानदारी से मेहनत करना है। आज की मेहनत ही आने वाले कल का भविष्य तय करेगी।कलेक्टर ने कक्षा आठवीं से लेकर बारहवीं तक के विद्यार्थियों से सीधे बातचीत की।
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उन्होंने किताबों और परीक्षा से आगे बढ़कर बच्चों से पूछा कि उन्हें स्कूल में भोजन कैसा मिल रहा है, रहने की क्या व्यवस्था है, पानी की समस्या तो नहीं है और पढ़ाई में उन्हें किन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यह संवाद इसलिए महत्वपूर्ण रहा क्योंकि बच्चों को अपनी बात किसी औपचारिक शिकायत के जरिए नहीं, बल्कि सीधे कलेक्टर के सामने रखने का अवसर मिला। विद्यार्थियों ने पानी सहित कुछ अन्य समस्याओं की जानकारी दी। कलेक्टर ने बताया कि क्षेत्र में जलस्तर नीचे जाने के कारण बोर असफल हुए हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पानी की समस्या के स्थायी समाधान के लिए नई पाइपलाइन बिछाई जा रही है और जल्द ही समस्या दूर होगी।
12वीं के बच्चों को दिए फिजिक्स के सवाल, सामने आई पढ़ाई की तस्वीर
कक्षा 12वीं साइंस के विद्यार्थियों से बातचीत के दौरान कलेक्टर ने उन्हें फिजिक्स के सवाल हल करने के लिए दिए। निर्धारित समय में विद्यार्थी सवाल हल नहीं कर पाए तो कलेक्टर ने इसे गंभीरता से लिया और संबंधित शिक्षक को शिक्षण व्यवस्था में आवश्यक सुधार के निर्देश दिए। उन्होंने बच्चों से कहा कि शिक्षक उनके भविष्य को बेहतर बनाने के लिए मार्गदर्शन करते हैं। पढ़ाई में किसी विषय को लेकर परेशानी हो तो शिक्षक से सवाल पूछें और अपनी शंकाओं का समाधान कराएं।
अनुपस्थित मिले 8 शिक्षक, कलेक्टर ने दिखाई सख्ती
शिक्षक दिवस के अवसर पर किए गए निरीक्षण के दौरान विद्यालय के कुछ शिक्षक और कर्मचारी अनुपस्थित मिले। विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर कुणाल दुदावत ने नाराजगी जताई। उन्होंने सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग श्रीकांत कसेर को अनुपस्थित पाए गए आठ शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि आवासीय विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों की शिक्षा और उनके सर्वांगीण विकास की जिम्मेदारी शिक्षकों पर है। इसमें किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
सिर्फ पढ़ाई की बात नहीं… डॉक्टर-इंजीनियर बनने का रास्ता भी दिखाया
कलेक्टर ने विद्यार्थियों को यह भी बताया कि जिला प्रशासन उनके सपनों को पूरा करने में उनके साथ खड़ा है। उन्होंने बताया कि NEET और JEE की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए जिला प्रशासन की ओर से आवासीय कोचिंग की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा उच्च शिक्षा के लिए देश के किसी सरकारी कॉलेज या महत्वपूर्ण संस्थान में चयन होने पर तथा डॉक्टर-इंजीनियरिंग जैसी व्यावसायिक शिक्षा के लिए शुल्क की आवश्यकता होने पर जिला प्रशासन द्वारा आवश्यक शुल्क उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाती है। यानी बच्चों को सिर्फ सपने देखने के लिए नहीं कहा गया, बल्कि उन सपनों तक पहुंचने के लिए प्रशासन की ओर से उपलब्ध अवसरों की जानकारी भी दी गई। कलेक्टर ने अच्छे अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को देश के महत्वपूर्ण संस्थानों के शैक्षणिक भ्रमण पर ले जाने की बात भी कही।
मोबाइल नहीं, अपने सपनों पर ध्यान दें
विद्यार्थियों से संवाद के दौरान कलेक्टर ने मोबाइल के अत्यधिक इस्तेमाल को लेकर भी उन्हें समझाया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी जीवन में पढ़ाई सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और मोबाइल का अत्यधिक उपयोग एकाग्रता को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने बच्चों से कहा कि किसी विषय को समझने में परेशानी हो तो मोबाइल के बजाय अपने शिक्षक से सवाल पूछें। शिक्षक से संवाद ही सीखने का सबसे मजबूत माध्यम है। कलेक्टर कुणाल दुदावत ने बच्चों को भरोसा दिलाया कि उनकी समस्याओं के समाधान के लिए जिला प्रशासन हमेशा तत्पर रहेगा। उन्होंने अपना मोबाइल नंबर विद्यार्थियों को उपलब्ध कराया और कहा कि वे यह नंबर अपने माता-पिता तक भी पहुंचाएं। उन्होंने बच्चों से कहा कि विद्यालय में किसी भी समस्या की स्थिति में पहले शिक्षक और विद्यालय प्रबंधन को जानकारी दें। जरूरत पड़ने पर उनकी बात जिला प्रशासन तक पहुंचाई जाएगी।
शिक्षक दिवस पर एक संदेश—बच्चों का भविष्य सिर्फ स्कूल की चारदीवारी तक सीमित नहीं
कलेक्टर का एकलव्य विद्यालय का यह दौरा कई मायनों में महत्वपूर्ण रहा। एक तरफ उन्होंने बच्चों के बीच बैठकर उन्हें सफलता का मंत्र दिया, वहीं दूसरी तरफ शिक्षकों की उपस्थिति, शिक्षण व्यवस्था, पानी, भोजन और आवास जैसी मूलभूत सुविधाओं की वास्तविक स्थिति को खुद समझने की कोशिश की। NEET-JEE की आवासीय कोचिंग, उच्च शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता, अच्छे प्रदर्शन पर शैक्षणिक भ्रमण और स्कूल की समस्याओं के तत्काल समाधान जैसे कदम बताते हैं कि जिला प्रशासन बच्चों की शिक्षा को सिर्फ पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित नहीं रखना चाहता। शिक्षक दिवस पर कलेक्टर का शिक्षक बनकर बच्चों के बीच पहुंचना और फिर एक प्रशासक की तरह व्यवस्था में सुधार के लिए सख्त फैसले लेना, इस पूरे दौरे ने यह संदेश दिया कि किसी भी बच्चे का सपना उसकी परिस्थितियों से छोटा नहीं होना चाहिए।


