सक्ती जिले के चंद्रपुर एवं डभरा में फर्जी केसीसी लोन की फाइल की स्वीकृति दिलाने वाले सुपरवाइजर जी पी राव के खिलाफ दस्तावेजीय प्रमाण मिलने के बाद भी कोई कार्यवाही होती नजर नहीं आ रही है।
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जांच अधिकारी ही जांच में भ्रष्टाचार करते नजर आ रहे है। इस मामले ने सुशासन सरकार के दावे की जमीनी हकीकत को बयां कर दिया है।
सुपर वाइजर राव ने भले ही जांच अधिकारी को सरसरी तौर पर दस्तावेज की जांच करने की बात कहकर मना लिया है, लेकिन सवाल एक या दो फर्जी केसीसी लोन का नहीं है बल्कि लगभग 200 से अधिक फर्जी केसीसी लोन का है जिसमें दस्तावेज परीक्षण निरीक्षण में गड़बड़ी हुई है।
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ऐसे में सुपरवाइजर की बात में कितनी सच्चाई है इसका अंदाजा जांच अधिकारी को लगाना था। लेकिन कहावत है ना सईया भये कोतवाल तो डर किस बात की लेकिन जांच अधिकारी इस बात को ना भूले सत्य परेशान हो सकता है लेकिन पराजित नहीं । शिकायत का सिलसिला आगे बढ़ेगा जिसमें जांच अधिकारी को भी सह आरोपी बनाने की मांग की जाएगी।


